Tragic Death in Khori Kalan: उस्ताद के लालच ने ली दीपक की जान

फरीदाबाद के तावडू क्षेत्र के खोरी कलां गांव में 27 वर्षीय कलाकार दीपक की मौत ने एक बार फिर से जिंदा समाधि के खतरनाक खेल पर सवाल उठाए हैं। दीपक के स्वजन का आरोप
फरीदाबाद के तावडू क्षेत्र के खोरी कलां गांव में 27 वर्षीय कलाकार दीपक की मौत ने एक बार फिर से जिंदा समाधि के खतरनाक खेल पर सवाल उठाए हैं। दीपक के स्वजन का आरोप है कि उसकी मौत किसी हादसे का परिणाम नहीं, बल्कि उसके उस्ताद सतीश उर्फ पुलसिया के लालच का नतीजा है। दीपक को 24 घंटे तक गड्ढे में समाधि लेने की प्रैक्टिस थी, लेकिन सतीश ने 71 सौ रुपये पूरे कराने के लालच में उसे 72 घंटे तक गड्ढे में बंद रखा, जिससे उसकी जान चली गई। स्वजन ने पुलसिया के खिलाफ लापरवाही से मौत का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। पुलिस को दी गई शिकायत में बताया गया है कि पुलसिया मथुरा के लक्ष्मीनगर का निवासी है और दीपक फरीदाबाद के गौंछी गांव का रहने वाला था।
दीपक की भाभी सुनीता ने बताया कि दीपक पिछले 10 वर्षों से गांव-गांव जाकर साइकिल चलाने और जिंदा समाधि का तमाशा दिखाता था। हर कार्यक्रम में यह घोषणा की जाती थी कि 71 सौ रुपये पूरे होने पर समाधि खोली जाएगी, लेकिन यह केवल लोगों को अधिक से अधिक रुपये देने के लिए एक प्रोत्साहन था। वास्तविकता यह थी कि चाहे जितनी भी रकम मिले, 24 घंटे पूरे होते ही दीपक को बाहर निकाल लिया जाता था। सुनीता ने आरोप लगाया कि इस बार 24 घंटे में 71 सौ रुपये पूरे नहीं हुए, इसलिए सतीश ने समाधि का समय बढ़ाकर 72 घंटे कर दिया। जब गांव के लोगों ने दीपक को अधिक समय तक बाहर नहीं निकाले जाने पर विरोध जताया, तब गड्ढे से मिट्टी हटाई गई, लेकिन तब तक दीपक की मौत हो चुकी थी।



















