Government's Initiative for Research in Bihar: 650 Students to Receive Monthly Fellowship of 15000

बिहार सरकार ने उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध कार्य को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डाक्टरल (रिसर्च) फेलोशिप स्कीम के तहत, राज्य के
बिहार सरकार ने उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध कार्य को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डाक्टरल (रिसर्च) फेलोशिप स्कीम के तहत, राज्य के 17 विश्वविद्यालयों और चार शोध संस्थानों में 650 शोधार्थियों को हर महीने 15,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह योजना उच्च शिक्षा विभाग द्वारा तैयार की गई है और इसके लिए 11 करोड़ 70 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है। फेलोशिप का उद्देश्य शोध कार्य को प्रोत्साहित करना और नवाचार को बढ़ावा देना है। इस योजना का निर्णय 26 जून को राज्यपाल सैयद अता हसनैन और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की बैठक में लिया गया था। फेलोशिप का लाभ उठाने के लिए शोधार्थियों को नेट उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा और उन्हें यूजीसी, सीएसआइआर-यूजीसी या आइसीएआर के तहत पीएचडी में नामांकित होना चाहिए। इसके अलावा, दूसरी श्रेणी में ऐसे शोधार्थियों को भी रखा गया है जिन्होंने केवल पीएचडी के लिए नेट पास किया हो। ऐसे शोधार्थियों को हर महीने 8,000 रुपये की सहायता मिलेगी। फेलोशिप के लिए अधिकतम उम्र सीमा 31 वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि दिव्यांग, महिला और आरक्षित वर्ग के शोधार्थियों को पांच वर्ष की छूट मिलेगी।
इस फेलोशिप स्कीम के तहत चयनित शोधार्थियों को तीन वर्षों तक वित्तीय सहायता मिलेगी। बिहार राज्य उच्च शिक्षा परिषद द्वारा शोधार्थियों का चयन किया जाएगा और इसके लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। प्राप्त आवेदनों की शॉर्टलिस्टिंग शिक्षाविदों और शोध निदेशकों की एक समिति द्वारा की जाएगी। इसके अलावा, शोध कार्य की प्रगति पर नजर रखने के लिए एक रिसर्च प्रोग्रेस मानीटरिंग कमेटी भी गठित की जाएगी। इस कमेटी में बिहार राज्य उच्च शिक्षा परिषद के सचिव को अध्यक्ष, उच्च शिक्षा निदेशक को सदस्य और एकेडमिक एक्सपर्ट को शामिल किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य शोध कार्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के स्तर पर लाना है, ताकि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शोध कार्य को वैश्विक पहचान मिल सके।



















