Celebration of Sawan in Bihar: बेटियों तक पहुंचेगा मायके का स्नेह, घर-घर होगी शिव आराधना

सोनाली दुबे, पटना। सावन का पावन महीना आज से शुरू हो गया है, और इस अवसर पर बिहार में एक विशेष उल्लास देखा जा रहा है। इस दौरान बेटियां अपने मायके से आने वाली सावन
सोनाली दुबे, पटना। सावन का पावन महीना आज से शुरू हो गया है, और इस अवसर पर बिहार में एक विशेष उल्लास देखा जा रहा है। इस दौरान बेटियां अपने मायके से आने वाली सावन पुड़िया का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। महिलाएं मिट्टी से भोलेनाथ का स्वरूप गढ़ने में जुटी हैं, जिससे हर घर में शिव भक्ति का रंग छा जाएगा। मां के मन में अपनी बेटियों के लिए स्नेह उमड़ता है, जो इस पवित्र महीने को और भी खास बनाता है। बिहार में सावन केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह रिश्तों को संजोने वाली जीवंत परंपराओं का उत्सव भी है। विशेषकर मिथिला क्षेत्र में सावन पुड़िया की परंपरा आज भी धूमधाम से मनाई जाती है। मिठाइयों में अनरसा, पीडुकिया और कई घरों में चीनी की पुड़ी का होना शुभ माना जाता है। यह परंपराएं पीढ़ियों से चली आ रही हैं और आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई हैं।
कंकड़बाग निवासी रश्मि रानी ने बताया कि सावन की शुरुआत होते ही बेटियों के लिए मायके से बांस के डाले या टोकरी में श्रृंगार का सामान, फल और मिठाइयां भेजी जाती हैं। यह परंपरा बेटियों को यह एहसास दिलाती है कि विवाह के बाद भी उनका मायका उनके लिए पहले जैसा ही अपना है। इसके अलावा, पार्थिव शिवलिंग की पूजा की एक अनोखी परंपरा भी है। महिलाएं शुद्ध स्थान से मिट्टी लाकर उसे छानती हैं और पानी मिलाकर गूंथती हैं। अपने हाथों से छोटे-छोटे शिवलिंग तैयार किए जाते हैं। कहीं एक शिवलिंग बनता है तो कहीं 11, 21, 51 या 101 पार्थिव शिवलिंग बनाकर सामूहिक पूजा की जाती है। पूजा के समय बेलपत्र, धतूरा, चंदन, फूल, दीपक और रंगोली से पूरा आंगन शिवमय हो उठता है। पूरे सावन भर इन शिवलिंगों की पूजा की जाती है, और सावन समाप्त होने पर इनका पवित्र जल में विसर्जन किया जाता है।



















