Decision on Regularization of Ad-hoc Teachers in UP: यूपी में एडहॉक शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के नियमितीकरण पर जल्द हो सकता है फैसला

लखनऊ से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत तदर्थ शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के नियमितीकरण का मामला जल्द सुलझ सक
लखनऊ से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत तदर्थ शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के नियमितीकरण का मामला जल्द सुलझ सकता है। विधान परिषद में इस संबंध में आश्वासन दिया गया है कि अगस्त माह के भीतर सकारात्मक निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा। यह जानकारी शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने शून्यकाल में दी। उन्होंने बताया कि सरकार समय-समय पर माध्यमिक शिक्षा अधिनियम, 1921 के तहत संचालित सहायता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत तदर्थ शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के नियमितीकरण के आदेश जारी करती रही है, लेकिन इस बार अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इससे शिक्षकों और प्रधानाचार्यों में चिंता का माहौल बना हुआ है।
ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने विधान परिषद में कहा कि सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य बनने के लिए कम से कम चार वर्ष का शिक्षण अनुभव अनिवार्य है। वर्तमान में ऐसे विद्यालयों में 80 प्रतिशत से अधिक प्रधानाचार्य तदर्थ रूप से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इसी वर्ष फरवरी में भी यह मामला सदन में उठाया गया था और पीठ ने आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं हो सका है। इस मुद्दे को लेकर शिक्षकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है और वे नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं।



















