Devotional Hub in UP: भक्ति और आस्था का केंद्र श्री नंदेश्वर धाम

कानपुर शहर से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित नरवल तहसील के सरसौल में रेलवे लाइन के किनारे विराजमान श्री नंदेश्वर धाम सावन के महीने में आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन
कानपुर शहर से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित नरवल तहसील के सरसौल में रेलवे लाइन के किनारे विराजमान श्री नंदेश्वर धाम सावन के महीने में आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है। यह मंदिर सदियों पुराना अर्धनारीश्वर स्वयंभू शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है, जो न केवल कानपुर बल्कि पूरे देश से भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यही वह पावन भूमि है जहां संत प्रेमानंद महाराज ने तपस्या की थी। सरसौल बस्ती से चार किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर को इच्छा पूर्ति शिवलिंग के नाम से भी जाना जाता है। बुजुर्गों के अनुसार, यह शिवलिंग सैकड़ों वर्ष पुराना है और यह स्वयं प्रकट हुआ है। दर्शन मात्र से भक्तों के दुख दूर हो जाते हैं, इसलिए दूर-दूर से लोग यहां पैदल, बाइक और बसों से आते हैं। सावन का महीना आते ही यहां का नजारा बदल जाता है। भगवान भोलेनाथ के प्रिय महीने सावन के पहले दिन से ही भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। मंदिर प्रांगण में सुबह से लेकर देर रात तक 'हर हर महादेव' के जयकारों की गूंज सुनाई देती है। पूरे महीने चलने वाले विशाल मेले में लाखों श्रद्धालु गंगाजल और बेलपत्र लेकर बाबा का जलाभिषेक करते हैं। हर सोमवार को विशेष रुद्राभिषेक और भंडारे आयोजित होते हैं। सावन के दौरान महाशिवरात्रि यहां की सबसे भव्य झांकी होती है, जहां सैकड़ों वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार जीवित सांपों से बाबा का श्रृंगार किया जाता है। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए आसपास के जिलों से भी श्रद्धालु आते हैं।
मंदिर कमेटी ने इस बार सावन के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। साफ-सफाई, सुरक्षा, पेयजल और प्रसाद की विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि आने वाले किसी भी भक्त को कोई दिक्कत न हो। भक्तों का अटूट विश्वास इस मंदिर की महत्ता को और बढ़ाता है। सरसौल के शिव भक्त चंद्रभान सिंह कहते हैं कि यह मंदिर लगभग दो सौ साल पुराना है और हम पूरा परिवार लेकर पूजन करने आते हैं। यहां जो भी मांगा है, वह मिला है। सरसौल निवासी अंकित तिवारी पिछले तीस साल से रोज दर्शन के लिए आते हैं। उनका कहना है कि हमारे परिवार की मानसिक और आर्थिक स्थिति में सुधार सिर्फ नंदेश्वर बाबा की कृपा से हुआ है। मुकेश कुशवाहा के अनुसार, सावन में हर साल दर्जनों भंडारे लगते हैं। यह क्षेत्र का ऐसा धाम है जहां हर किसी की मुराद पूरी होती है। सावन और महाशिवरात्रि पर यहां मेला किसी उत्सव से कम नहीं होता। नंदेश्वर धाम एक बार फिर भक्ति, आस्था और चमत्कार की कहानियों से भर जाएगा। यहां आने वाला हर भक्त एक विश्वास लेकर आता है और एक नई उम्मीद लेकर लौटता है कि बाबा नंदेश्वर सबकी सुनते हैं।



















