Student Protest in Jharkhand: शिक्षा-परीक्षा तंत्र में धांधली के खिलाफ छात्रों का आंदोलन

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (यूजी) पेपर लीक के खिलाफ चल रहे जेन जी आंदोलन की गूंज अभी थमी नहीं थी कि झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती पर
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (यूजी) पेपर लीक के खिलाफ चल रहे जेन जी आंदोलन की गूंज अभी थमी नहीं थी कि झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, ओएमआर शीट से छेड़छाड़ और धांधली के खिलाफ छात्रों का आंदोलन तेजी से बढ़ता जा रहा है। यह आंदोलन शिक्षा एवं परीक्षा तंत्र की बदहाली को दर्शाता है। इस बार छात्रों का निशाना केंद्र सरकार नहीं, बल्कि राज्य की हेमंत सोरेन सरकार है। पिछले कुछ दिनों से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र अनिश्चितकालीन धरने और आमरण अनशन पर बैठे हैं। छात्रों की मुख्य मांग है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाए। इसके अलावा, भर्ती घोटालों की निगरानी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की देखरेख में होनी चाहिए, चयन प्रणाली को डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाए, दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और पूरे मामले की जांच सीबीआई और ईडी द्वारा कराई जाए। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों को निष्पक्ष जांच और न्याय का भरोसा दिया है और छात्र प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। इस आंदोलन को कई राजनीतिक, सामाजिक और छात्र संगठनों का समर्थन मिल रहा है, जिसमें जंतर-मंतर पर आंदोलन का चेहरा बने सोनम वांगचुक भी शामिल हैं। इससे हेमंत सोरेन सरकार पर नैतिक दबाव बढ़ गया है और वह बैकफुट पर नजर आ रही है। रांची की सड़कों पर चल रहा यह आंदोलन दरअसल देश के शिक्षा तंत्र में गहराई तक पैठ जमाई बीमारी का संकेत है।
देशभर में युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और योग्यता के अनुरूप नौकरियों की कमी के कारण व्यवस्था के प्रति निराशा बढ़ती जा रही है। यह केवल झारखंड की समस्या नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में पिछले कुछ वर्षों से ऐसी धांधली की शिकायतें लगातार सुनने को मिल रही हैं। उदाहरण के लिए, पंजाब में फार्मेसी अफसर भर्ती परीक्षा में पेपर लीक और धांधली के खिलाफ छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्र सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जता रहे हैं। इन आंदोलनों के संदर्भ में राजनीतिक पक्ष भी विचारणीय है। यदि एक राज्य में छात्र आंदोलन का समर्थन किया जाता है और दूसरे राज्यों में उन्हीं मुद्दों पर मौन रहना राजनीतिक सुविधा के आधार पर तय किया जाता है, तो इससे राजनीतिक दलों की नैतिक साख कमजोर होगी। शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से परे होकर केंद्र और राज्य सरकारों तथा सभी राजनीतिक दलों को देश के छात्रों और युवाओं के हित में शिक्षा और परीक्षा प्रणाली को स्वच्छ और धांधलीमुक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।



















