University action against professor: संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने प्रोफेसर बृजभूषण ओझा पर लगाया प्रतिबंध

वाराणसी से जागरण संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के व्याकरण विभाग के आचार्य प्र
वाराणसी से जागरण संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के व्याकरण विभाग के आचार्य प्रोफेसर बृजभूषण ओझा पर गंभीर आरोपों के चलते प्रतिबंध लगा दिया है। यह कार्रवाई तब की गई जब एक युवक ने उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने एक संस्कृत महाविद्यालय में शिक्षक की नौकरी दिलाने के नाम पर चार लाख रुपये लिए और फिर उसे टरका दिया। इस मामले का आडियो और थानाध्यक्ष को लिखित तहरीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया। बुधवार को कुलसचिव की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि प्रोफेसर ओझा को विश्वविद्यालय के सभी शैक्षणिक और प्रशासनिक निकायों से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। इसके साथ ही, उन्हें विश्वविद्यालय की साख और नैतिक मानकों की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह आदेश कुलपति के निर्देशानुसार जारी किया गया है और इसका उद्देश्य विश्वविद्यालय की संस्थागत गरिमा को बनाए रखना है।
प्रोफेसर ओझा पर आरोप लगाने वाले दीपक कुमार पांडेय ने बताया कि उन्होंने प्रोफेसर से चार लाख रुपये लिए थे, लेकिन न तो उन्हें नियुक्ति मिली और न ही पैसे वापस किए गए। जब उन्होंने पैसे वापस मांगने की कोशिश की, तो प्रोफेसर ने उन्हें टालने का प्रयास किया। दीपक ने इस संबंध में लंका थाने में एफआईआर दर्ज करने के लिए आवेदन दिया और साथ ही प्रोफेसर के साथ बातचीत का आडियो भी इंटरनेट मीडिया पर साझा किया। इस मामले में पुलिस ने दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत की, जिसके बाद प्रोफेसर ओझा ने दीपक को रुपये वापस कर दिए। हालांकि, दीपक ने बाद में अपना शिकायती पत्र वापस ले लिया।


















