Opportunities in Castor Cultivation and Sericulture: अरंडी की खेती के साथ रेशम कीट पालन का मौका, किसानों को बताए आधुनिक तकनीक के गुण

फतेहपुर से जागरण संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, किसानों की आय को बढ़ाने और परंपरागत खेती के साथ-साथ अतिरिक्त आमदनी के नए विकल्प उपलब्ध कराने के लिए रेशम विभाग
फतेहपुर से जागरण संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, किसानों की आय को बढ़ाने और परंपरागत खेती के साथ-साथ अतिरिक्त आमदनी के नए विकल्प उपलब्ध कराने के लिए रेशम विभाग ने सीपीएस स्कूल में 'मेरा रेशम, मेरा अभिमान' अभियान के तहत एक किसान गोष्ठी का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों ने मिलकर किसानों को अरंडी की खेती और रेशम कीट पालन की आधुनिक तकनीकों के बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही, सरकारी योजनाओं और अनुदान के लाभों की भी विस्तृत चर्चा की गई। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को नई तकनीकों से अवगत कराना और उनकी आय में वृद्धि करना है।
केंद्रीय रेशम अनुसंधान एवं प्रसार केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. धर्मेंद्र कुमार जिज्ञाशु ने बताया कि जिले की जलवायु अरंडी की खेती और रेशम कीट पालन के लिए अत्यंत अनुकूल है। उन्होंने किसानों को बताया कि यदि वे सही तकनीक का उपयोग करें तो वे अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं। सहायक निदेशक कल्पना गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि विभाग इच्छुक किसानों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 75 हजार रुपये तक का अनुदान भी उपलब्ध करा रहा है। यह अनुदान किसानों को रेशम कीट पालन के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने में मदद करेगा।



















