Teacher Shortage in Delhi: शिक्षकों की कमी से हांफ रहे दिल्ली के सरकारी स्कूल

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में नए भवन और स्मार्ट क्लासरूम के बावजूद, शिक्षकों की कमी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। हाल ही में की गई एक पड़ताल में यह स्पष्ट हुआ है क
दिल्ली के सरकारी स्कूलों में नए भवन और स्मार्ट क्लासरूम के बावजूद, शिक्षकों की कमी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। हाल ही में की गई एक पड़ताल में यह स्पष्ट हुआ है कि कई विद्यालयों में नियमित शिक्षकों के पद लंबे समय से खाली हैं। उपलब्ध शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का अतिरिक्त बोझ भी है, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। दिल्ली सरकार के स्कूलों में लगभग 44 हजार नियमित शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक, स्नातकोत्तर शिक्षक और प्राथमिक शिक्षक शामिल हैं। इसके बावजूद, 15,495 अतिथि शिक्षकों की सेवाएं ली जा रही हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि स्कूलों में लगभग हर चौथा शिक्षक अतिथि शिक्षक है। वर्तमान में 6,787 नियमित शिक्षकों के पद रिक्त हैं, और शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सेवानिवृत्ति और नई नियुक्तियों के बीच लंबे अंतराल के कारण यह स्थिति बनी हुई है। अतिथि शिक्षकों की भूमिका केवल सामान्य कक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि विशेष शिक्षा के लिए भी कई अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अतिथि शिक्षकों की सेवाएं हटाई जाती हैं, तो कई विद्यालयों में नियमित कक्षाओं का संचालन प्रभावित हो सकता है।
पश्चिमी दिल्ली के निगम विद्यालयों में शिक्षकों की कमी की स्थिति गंभीर है। अधिकारियों के अनुसार, केवल पश्चिमी जोन में ही 125 शिक्षकों के पद रिक्त हैं। विडंबना यह है कि जो शिक्षक उपलब्ध हैं, उन्हें भी जनगणना, विशेष गहन पुनरीक्षण, सर्वे और अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगाया जाता है। इससे कक्षा शिक्षण का समय प्रभावित होता है और विद्यार्थियों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ता है। पूर्वी दिल्ली में भी स्थिति अलग नहीं है, जहां करीब 60 सरकारी स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। यमुना विहार स्थित एक सरकारी विद्यालय में संस्कृत शिक्षक का पद लंबे समय से खाली है, जिससे छात्रों को वैकल्पिक व्यवस्था से पढ़ाई कराई जाती है। गोकलपुरी के सर्वोदय कन्या विद्यालय में हिंदी और संस्कृत दोनों विषयों के शिक्षकों की कमी है, जहां एक शिक्षक को लगभग 70 विद्यार्थियों को पढ़ाना पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि कई बार दो कक्षाओं को एक साथ पढ़ाया जाता है।



















