Budget Concerns in Faridabad: फरीदाबाद के सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति पर चिंता

फरीदाबाद में सरकारी स्कूलों की स्थिति आज भी चिंताजनक बनी हुई है। शिक्षा विभाग द्वारा छात्रों को बेहतर शिक्षा देने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि क
फरीदाबाद में सरकारी स्कूलों की स्थिति आज भी चिंताजनक बनी हुई है। शिक्षा विभाग द्वारा छात्रों को बेहतर शिक्षा देने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि कई विद्यालयों में कक्षाएं अंधेरे में संचालित हो रही हैं। बिजली की व्यवस्था दुरुस्त नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को पढ़ाई में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, स्कूल परिसर में स्थित पानी की टंकी भी बदहाल है। नियमित साफ-सफाई और रखरखाव के अभाव में छात्रों को स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता पर सवाल उठ रहे हैं। गर्मी के मौसम में यह टंकी सैकड़ों विद्यार्थियों के लिए प्यास बुझाने का एकमात्र साधन है, लेकिन इसकी स्थिति देखकर अभिभावकों में चिंता बढ़ रही है। शौचालयों की स्थिति भी बेहद खराब है। कई शौचालय जर्जर होकर कंडम घोषित होने की स्थिति में पहुंच चुके हैं। दरवाजे टूटे हुए हैं और पानी की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में छात्र-छात्राओं, विशेषकर बालिकाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
'दैनिक जागरण' द्वारा चलाए जा रहे अभियान 'साल बदला लेकिन स्कूलों की स्थिति नहीं' के तहत मंगलवार को शहर के सरकारी स्कूलों की पड़ताल की गई। इस दौरान स्कूलों की स्थिति ने शिक्षा विभाग और प्रदेश सरकार के दावों को हवा हवाई साबित कर दिया। शौचालयों की मरम्मत, पानी की व्यवस्था और साफ-सफाई के नाम पर हर वर्ष जारी होने वाले बजट पर भी सवाल उठाए गए हैं। संवाददाता ने दोपहर करीब 12 बजे राहुल कालोनी स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला का दौरा किया। यहां विद्यार्थियों के पीने के पानी की टंकी पर गंदगी नजर आई। शौचालयों के दरवाजे भी टूटे हुए थे। सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या 170 है, लेकिन यहां जलभराव और गंदगी की स्थिति बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।



















