Kanwar Yatra 2026: जलाभिषेक के बाद भी मानें ये जरूरी नियम

सावन का महीना आते ही शिव भक्तों के लिए कांवड़ यात्रा एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान बन जाती है। हर साल लाखों श्रद्धालु गंगाजल लेने के लिए पैदल यात्रा करते हैं औ
सावन का महीना आते ही शिव भक्तों के लिए कांवड़ यात्रा एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान बन जाती है। हर साल लाखों श्रद्धालु गंगाजल लेने के लिए पैदल यात्रा करते हैं और सावन शिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। हालांकि, कांवड़ यात्रा केवल जल लाने और चढ़ाने तक सीमित नहीं है। इस यात्रा के दौरान भक्त कई नियमों का पालन करते हैं, जो जलाभिषेक के बाद भी जारी रहते हैं।
कांवड़ यात्रा 2026 में 30 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त तक चलेगी, जो सावन शिवरात्रि के दिन समाप्त होगी। इस दौरान देशभर से शिव भक्त गंगाजल लेकर अपने-अपने क्षेत्र के शिव मंदिरों में पहुंचेंगे। सावन का पूरा महीना 28 अगस्त 2026 तक रहेगा, और इस दौरान भगवान शिव की पूजा का सिलसिला जारी रहेगा।
कांवड़ यात्रा के दौरान भक्तों को जलाभिषेक के बाद भी सात्विक जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है। मांसाहार, शराब और नशे जैसी चीजों से दूर रहना जरूरी होता है। तामसिक भोजन से बचकर सात्विक भोजन करने पर जोर दिया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यात्रा पूरी करने के बाद भी मन, वचन और कर्म से पवित्रता बनाए रखना आवश्यक है।
गंगाजल चढ़ाने के बाद, भक्तों को सावन के बाकी दिनों में भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए और ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। शिवलिंग पर जलाभिषेक के बाद कुछ समय शांत मन से मंदिर में बैठकर ध्यान करने की भी सलाह दी जाती है। कांवड़ को पवित्र माना जाता है, इसलिए इसे लापरवाही से रखने से बचना चाहिए।



















