Sawan Shivratri 2026: सावन शिवरात्रि पर भद्रा का साया जलाभिषेक पर करेगा असर?

सावन के पवित्र महीने में आने वाली सावन शिवरात्रि का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व होता है। इस दिन देश भर के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखने क
सावन के पवित्र महीने में आने वाली सावन शिवरात्रि का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व होता है। इस दिन देश भर के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है। कावड़िये हरिद्वार और अन्य तीर्थ स्थलों से पवित्र गंगाजल लाकर भगवान शिव पर अर्पित करते हैं। वर्ष 2026 में सावन शिवरात्रि 11 अगस्त, मंगलवार को मनाई जाएगी। इस दिन भद्रा का साया भी रहेगा, जिससे श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या भद्रा काल का असर जलाभिषेक और पूजा पर पड़ेगा।
द्रिक पंचांग के अनुसार, 11 अगस्त 2026 को भद्रा सुबह 5 बजकर 48 मिनट से शुरू होगी और दोपहर 3 बजकर 22 मिनट तक रहेगी। इसका मतलब है कि सावन शिवरात्रि के दिन भद्रा का प्रभाव सुबह से लेकर दोपहर तक रहेगा। भद्रा काल को मुख्य रूप से मांगलिक और शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है, जैसे विवाह और गृह प्रवेश। लेकिन भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक को इस श्रेणी में नहीं रखा जाता।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भद्रा काल के दौरान शिव पूजा करने पर सामान्य तौर पर रोक नहीं मानी जाती। अगर कोई भक्त सुबह भगवान शिव का जलाभिषेक करना चाहता है, तो वह श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर जल अर्पित कर सकता है। भद्रा का विचार मुख्य रूप से मांगलिक कार्यों के लिए किया जाता है, लेकिन शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा और अभिषेक धार्मिक उपासना का हिस्सा है।
11 अगस्त को सावन शिवरात्रि के दिन भद्रा के साथ कुछ शुभ योग और नक्षत्र भी रहेंगे। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस दिन सिद्धि योग सुबह से शाम 6 बजकर 51 मिनट तक रहेगा, और पुनर्वसु नक्षत्र सूर्योदय से सुबह 10 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। इसके बाद पुष्य नक्षत्र शुरू होगा। इस प्रकार, दिनभर भगवान शिव की पूजा के लिए अलग-अलग समय और परंपराओं के अनुसार पूजा की जा सकती है।



















