BHU Scientists' Major Discovery: अब खास 'वायरस' खत्म करेंगे दांतों के कीड़े, रूट कैनाल के बाद नहीं होगा दोबारा इंफेक्शन

दांतों की सड़न और रूट कैनाल उपचार के बाद होने वाले संक्रमण से परेशान लोगों के लिए बीएचयू के वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है। इस तकनीक में खास प्रकार के
दांतों की सड़न और रूट कैनाल उपचार के बाद होने वाले संक्रमण से परेशान लोगों के लिए बीएचयू के वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है। इस तकनीक में खास प्रकार के प्राकृतिक वायरस, जिन्हें बैक्टीरियोफेज कहा जाता है, का उपयोग किया जाएगा। यह वायरस केवल हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करने में सक्षम हैं, जबकि यह मुंह में मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया को सुरक्षित रखते हैं। वर्तमान में दांतों की सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाले एंटीबायोटिक और माउथवाश न केवल हानिकारक बैक्टीरिया को प्रभावित करते हैं, बल्कि अच्छे बैक्टीरिया को भी नुकसान पहुंचाते हैं। बैक्टीरियोफेज का उपयोग करने से इस समस्या का समाधान हो सकता है।
शोधकर्ताओं ने बच्चों की लार और दांतों पर जमी प्लाक से बैक्टीरियोफेज को अलग किया। प्लाक एक चिपचिपी परत होती है जो दांतों और मसूड़ों पर बनती है और दांतों की सड़न का मुख्य कारण होती है। प्रयोगशाला में 24 और 72 घंटे तक बैक्टीरियोफेज का परीक्षण किया गया। जब इनका उपयोग कैविटी पैदा करने वाले बैक्टीरिया स्ट्रैपटोकोकस म्यूटंस पर किया गया, तो परिणाम बेहद प्रभावी रहे। बैक्टीरियोफेज ने क्लोरहेक्सिडिन की तुलना में अधिक तेजी से बैक्टीरिया की परत को खत्म किया। इस शोध के आधार पर भविष्य में ऐसे टूथपेस्ट और माउथवाश तैयार किए जा सकते हैं, जो केवल हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करेंगे।



















