Breath-based diabetes detection: सांसों से होगी डायबिटीज की पहचान, बिना खून के जांचेगा नया नैनो-सेंसर

वाराणसी से संग्राम सिंह की रिपोर्ट के अनुसार, डायबिटीज की जांच के लिए अब अंगुली में सुई चुभोकर खून निकालने की आवश्यकता भविष्य में कम हो सकती है। काशी हिंदू विश्
वाराणसी से संग्राम सिंह की रिपोर्ट के अनुसार, डायबिटीज की जांच के लिए अब अंगुली में सुई चुभोकर खून निकालने की आवश्यकता भविष्य में कम हो सकती है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के भौतिकी विभाग और ताइवान के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक अत्याधुनिक नैनो-सेंसर विकसित किया है, जो केवल सांस की जांच से डायबिटीज का पता लगाने में सक्षम होगा। यह तकनीक इंसान की सांस में मौजूद एसीटोन गैस की मात्रा को मापती है, जो शरीर में वसा के टूटने के दौरान उत्पन्न होती है। मधुमेह के मरीजों की सांस में एसीटोन का स्तर सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होता है, जिससे यह नैनो-सेंसर उनकी स्थिति का सही आकलन कर सकता है। वर्तमान में देश में 10 करोड़ से अधिक डायबिटीज के रोगी हैं, ऐसे में यह तकनीक सस्ती, आसान और दर्दरहित जांच का एक प्रभावी विकल्प बन सकती है। फिलहाल, इस तकनीक का पेटेंट कराने की प्रक्रिया चल रही है।
यह नैनो-सेंसर सेलेनियम, ग्राफीन और कार्बन नैनोट्यूब्स जैसे विशेष पदार्थों से तैयार किया गया है। इन सामग्रियों की मदद से सेंसर बेहद कम मात्रा में मौजूद एसीटोन गैस को भी तुरंत पहचानने में सक्षम है। इस तकनीक का उपयोग करने के लिए न तो खून का नमूना देना होगा और न ही सुई की जरूरत पड़ेगी, जिससे मरीजों को जांच के दौरान होने वाली असुविधा से राहत मिलेगी। इस शोध को बीएचयू के प्रोफेसर नीरज मेहता के मार्गदर्शन में शोधकर्ता सचिन कुमार यादव ने किया है, जिसमें ताइवान की मिंग ची यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर मेंग-फैंग लिन का भी सहयोग शामिल है।



















