PM Jan Aushadhi Kendra: जन-औषधि केंद्रों से बिहार के लोगों ने बचाए 2000 करोड़, ब्रांडेड दवाओं से 80% तक सस्ती

पटना से मिली जानकारी के अनुसार, जन-औषधि केंद्रों ने बिहार के नागरिकों को लगभग 2000 करोड़ रुपये की बचत कराई है। यह आंकड़ा हालांकि सरकारी रूप से संकलित नहीं किया
पटना से मिली जानकारी के अनुसार, जन-औषधि केंद्रों ने बिहार के नागरिकों को लगभग 2000 करोड़ रुपये की बचत कराई है। यह आंकड़ा हालांकि सरकारी रूप से संकलित नहीं किया गया है, लेकिन मोटे तौर पर यह अनुमान लगाया गया है कि पिछले 12 वर्षों में जेनरिक दवाइयों के माध्यम से यह बचत संभव हुई है। जन-औषधि योजना के अंतर्गत, देशभर में नागरिकों को लगभग 45000 करोड़ रुपये की बचत का अनुमान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा लगाया गया है। बिहार में वर्तमान में 1304 जन-औषधि केंद्र संचालित हैं, जबकि 2014 में इस योजना की शुरुआत के समय केवल आधा दर्जन केंद्र ही थे। अब सभी प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) को भी जन-औषधि केंद्र खोलने की अनुमति दी गई है, हालांकि यह नीतिगत रूप से अनिवार्य नहीं है। यह पूरी तरह से उनकी इच्छा पर निर्भर करता है।
बिहार के 22 पैक्स सहित देशभर में 846 पैक्स में जन-औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का लक्ष्य है कि मार्च 2027 तक पूरे देश में जन-औषधि केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 25000 की जाए। हालांकि, राज्यवार इसके लिए कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है। जुलाई 2023 तक देश में 20149 जन-औषधि केंद्र संचालित थे, जबकि 2014 में इस योजना की शुरुआत केवल 80 केंद्रों के साथ हुई थी। जन-औषधि उत्पादों की सूची में 2110 दवाएं और 315 शल्य चिकित्सा उत्पाद एवं उपकरण शामिल हैं। ये दवाएं हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, संक्रमण, एलर्जी, गैस्ट्रो-इंटेस्टाइनल समस्याओं और न्यूट्रास्यूटिकल्स जैसे प्रमुख चिकित्सकीय समूहों को कवर करती हैं।



















