DU Study: दिल्ली में यमुना के पानी से मछलियों में घुला माइक्रोप्लास्टिक, वैज्ञानिकों ने बताया सबके लिए खतरनाक

दिल्ली में यमुना नदी का बढ़ता प्लास्टिक प्रदूषण अब केवल नदी की सफाई का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह जलीय जीवों और मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरे के रूप
दिल्ली में यमुना नदी का बढ़ता प्लास्टिक प्रदूषण अब केवल नदी की सफाई का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह जलीय जीवों और मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरे के रूप में सामने आया है। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के जूलॉजी विभाग की फिश मॉलिक्यूलर बायोलॉजी लैब द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि दिल्ली से पकड़ी गई यमुना की हर मछली में माइक्रोप्लास्टिक के कण मिले हैं। यह अध्ययन इस बात की पुष्टि करता है कि यमुना नदी में बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण का असर जलीय जीवन पर पड़ रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये छोटे प्लास्टिक कण मछलियों के शरीर में जमा हो सकते हैं और उनके साथ कई हानिकारक रसायन भी उनके शरीर में पहुंच सकते हैं। ऐसे में मछलियों का सेवन करने वाले लोगों के लिए यह एक गंभीर स्वास्थ्य खतरा बन सकता है।
इस अध्ययन के अनुसार, मछलियों में पाए जाने वाले माइक्रोप्लास्टिक कण मानव स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय हैं। यदि इन मछलियों का लगातार सेवन किया जाए, तो यह मानव स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का समाधान करने के लिए नदियों, झीलों और समुद्रों में प्लास्टिक कचरा जाने से रोकना अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही, वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि नदी और मछलियों की समय-समय पर जांच कराई जानी चाहिए ताकि इस समस्या का सही आकलन किया जा सके।



















