Citizenship certificates for Matua refugees: बंगाल में 300 मतुआ शरणार्थियों को मिला नागरिकता प्रमाणपत्र

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को उत्तर 24 परगना जिले में 300 मतुआ शरणार्थियों को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा नाग
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को उत्तर 24 परगना जिले में 300 मतुआ शरणार्थियों को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत भारतीय नागरिकता का प्रमाणपत्र प्रदान किया। यह कार्यक्रम कोलकाता के न्यूटाउन स्थित विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया गया, जहां मुख्यमंत्री ने इन शरणार्थियों को प्रमाणपत्र सौंपे। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि सीएए का उद्देश्य किसी की नागरिकता छीनना नहीं है, बल्कि यह उन पात्र व्यक्तियों को नागरिकता प्रदान करने के लिए बनाया गया है, जो भारत में धार्मिक उत्पीड़न के कारण आए हैं। उन्होंने शरणार्थियों से अपील की कि वे आगे आकर सीएए के तहत आवेदन करें और अपने अधिकारों का लाभ उठाएं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मतुआ समुदाय को नागरिकता देने का जो वादा किया था, उसे पूरा किया जा रहा है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि उनकी सरकार ने राजनीतिक स्वार्थ के चलते सीएए के बारे में लोगों में भ्रम फैलाया और इसका विरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गलत जानकारी के कारण लोगों में सीएए के प्रति आशंकाएं पैदा की गई थीं। उन्होंने यह भी बताया कि सीएए का मुख्य उद्देश्य उन शरणार्थियों को सम्मानपूर्वक नागरिकता प्रदान करना है, जो पड़ोसी देशों से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में और भी पात्र लोगों को नागरिकता प्रमाणपत्र दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बंगाल में हुए सीएए विरोधी आंदोलनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन आंदोलनों के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया, और ट्रेनों, स्टेशनों तथा बसों में आगजनी की गई। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अब केंद्र और राज्य सरकार मिलकर पात्र लोगों तक नागरिकता का लाभ पहुंचाने के लिए कार्य कर रही है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि मतुआ समुदाय की नागरिकता का मुद्दा पिछले कई वर्षों से बंगाल की राजनीति का एक प्रमुख विषय बना हुआ है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मतुआ समुदाय को नागरिकता देने का वादा किया था। इसके बाद संसद से नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पारित हुआ, और अब 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले यह कानून लागू होने के बाद पात्र आवेदकों को चरणबद्ध तरीके से नागरिकता प्रमाणपत्र दिए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया से मतुआ समुदाय के लोगों को काफी उम्मीदें हैं, और वे अपने अधिकारों को प्राप्त करने के लिए उत्सुक हैं।
सीएए के तहत नागरिकता प्राप्त करने के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पात्र व्यक्ति इस प्रक्रिया से वंचित न रहे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि सभी शरणार्थियों को सम्मान के साथ नागरिकता दी जाए, ताकि वे भारत में सुरक्षित और सम्मानित जीवन जी सकें। इस कार्यक्रम में शामिल हुए शरणार्थियों ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया और कहा कि यह उनके लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। नागरिकता मिलने से उन्हें अपने अधिकारों का एहसास होगा और वे अपने भविष्य को लेकर अधिक आश्वस्त महसूस करेंगे।















