Congress stands firm on FCRA, redistricting equations change: कांग्रेस ने एफसीआरए पर अड़कर परिसीमन पर समीकरण बदले

संसद के मानसून सत्र का अंतिम सप्ताह महत्वपूर्ण है। इस दौरान एफसीआरए और परिसीमन बिलों पर विवाद गहरा गया है। कांग्रेस और सरकार के बीच टकराव जारी है। सूत्रों के अन
संसद के मानसून सत्र का अंतिम सप्ताह महत्वपूर्ण है। इस दौरान एफसीआरए और परिसीमन बिलों पर विवाद गहरा गया है। कांग्रेस और सरकार के बीच टकराव जारी है। सूत्रों के अनुसार, ईसाई संगठनों का कांग्रेस पर एफसीआरए बिल का विरोध करने का दबाव है। वहीं, परिसीमन के मुद्दे पर कांग्रेस में एकमत नहीं है। डीएमके परिसीमन बिल का समर्थन कर सकती है, जिससे दक्षिण भारतीय दलों के विरोध का मुद्दा समाप्त हो सकता है। हालांकि, तमिलनाडु कांग्रेस के कुछ नेता इस मुद्दे को बनाए रखना चाहते हैं।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एक्टर विजय के पास लोकसभा में कोई सांसद नहीं है, जिससे उनके लिए परिसीमन पर रुख अपनाना आसान है। कांग्रेस गिव एंड टेक की नीति अपनाना चाहती है, यानी एक बिल पर सरकार झुके तो दूसरे बिल के पारित होने का रास्ता बने। कांग्रेस एफसीआरए और परिसीमन दोनों का विरोध कर रही है, लेकिन डीएमके के बदलते रुख और सीटों में वृद्धि के प्रावधान के बाद, परिसीमन पर विरोध का कारण कम हो गया है। कांग्रेस चाहती है कि एफसीआरए बिल वापस लिया जाए या उसमें संशोधन किया जाए।
यदि कांग्रेस के विरोध के बावजूद दोनों बिल पारित हो जाते हैं, तो ईसाई संगठनों को जवाब देना कांग्रेस के लिए मुश्किल होगा। सरकार अगले दो दिनों में अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने की तैयारी में है। एफसीआरए इसी सत्र में पारित किया जा सकता है, जबकि परिसीमन के लिए विशेष सत्र बुलाने का विकल्प भी मौजूद है।
अगले सप्ताह सभी एनडीए सांसदों को संसद में रहने के लिए कहा गया है। गृह मंत्री के बयान के कारण गतिरोध बना हुआ है। सरकार ने कहा है कि एफसीआरए की बहस का जवाब वह दे सकते हैं, लेकिन कांग्रेस नरम नहीं पड़ रही है। वह दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर अमित शाह का बयान चाहती है। इसी बहाने दोनों बिलों को टालने का प्रयास किया जा रहा है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने संसद सत्र के अंतिम हफ्ते के लिए व्हिप जारी किया है, जिसमें सदस्यों को सदन में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।
















