Delhi Riots: पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को कोर्ट ने ठहराया दोषी

दिल्ली में 2020 में हुए दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया
दिल्ली में 2020 में हुए दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने पूर्व एमसीडी पार्षद ताहिर हुसैन को हत्या, अपहरण और दंगे जैसे गंभीर अपराधों में दोषी करार दिया है। यह फैसला लगभग छह साल की लंबी जांच, फॉरेंसिक साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर आया है। अदालत ने ताहिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी माना है। इस निर्णय के बाद अब यह जानना महत्वपूर्ण है कि इन धाराओं में क्या प्रावधान हैं और दोष सिद्ध होने पर ताहिर हुसैन को कितनी सजा हो सकती है।
अदालत ने ताहिर हुसैन को मुख्य रूप से आईपीसी की धारा 302 (हत्या), धारा 363 (अपहरण) और धारा 147 (दंगा) के तहत दोषी ठहराया है। इन धाराओं के तहत गंभीर अपराधों के लिए कठोर दंड का प्रावधान है। विशेष रूप से हत्या के मामले में, कानून मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा का विकल्प देता है। सजा का अंतिम निर्णय अदालत दोषसिद्धि के बाद दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद करेगी। आईपीसी की धारा 302 हत्या के अपराध के लिए सजा निर्धारित करती है, जिसमें दोषी पाए जाने पर मृत्युदंड या आजीवन कारावास के साथ जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
















