Gorakhpur Minor Murder Case: गोरखपुर बालिका हत्याकांड में आरोपी सिपाही पर पहले भी लगे थे गंभीर आरोप

गोरखपुर में हाल ही में हुए बालिका हत्याकांड ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। डायल-112 में तैनात अभिषेक यादव पर पहले भी एक युवती के साथ हैवानियत
गोरखपुर में हाल ही में हुए बालिका हत्याकांड ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। डायल-112 में तैनात अभिषेक यादव पर पहले भी एक युवती के साथ हैवानियत का आरोप लगाया गया था, जिसके चलते उसे जेल भेजा गया था। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब यह पता चला कि ऐसे गंभीर आरोपों के बावजूद उसे फिर से उसी जिले में तैनाती कैसे मिल गई। यह सवाल अब गोरखपुर के नागरिकों के मन में गहराई से बैठ गया है कि क्या पुलिस विभाग में ऐसे आरोपों के बाद भी सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है। अभिषेक यादव पर आरोप था कि उसने फरवरी 2025 में एक युवती को रेलवे स्टेशन से पूछताछ के बहाने अपने साथ ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इस मामले में उसे निलंबित किया गया था, लेकिन उसके बाद भी उसकी तैनाती की प्रक्रिया में क्या कमी रह गई, यह जांच का विषय है।
पुलिस विभाग के नियमों के अनुसार, किसी सिपाही का निलंबन पुलिस अधीक्षक द्वारा किया जा सकता है, जबकि इंस्पेक्टर और दारोगा के निलंबन के लिए उच्च अधिकारियों की अनुमति आवश्यक होती है। निलंबन के दौरान सिपाही को पुलिस लाइन में रखा जाता है, जहां उसे नियमित हाजिरी देनी होती है। इस दौरान उसे पूरा वेतन नहीं मिलता, बल्कि केवल निर्वाह भत्ता दिया जाता है। यदि निलंबन के 90 दिन के भीतर विभागीय चार्जशीट जारी नहीं होती, तो सिपाही को बहाल किया जा सकता है। लेकिन यदि चार्जशीट जारी होती है, तो निलंबन जारी रहता है और विभागीय जांच आगे बढ़ती है। अभिषेक यादव के मामले में यह देखा गया कि उसे जेल से छूटने के बाद सितंबर 2025 में बहाल कर दिया गया और फिर से उसी जिले में तैनाती दी गई।
















