Article 370's Impact: PoK से जम्मू-कश्मीर की स्थिति में बदलाव

डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (pojk) की स्थिति में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। भारत का यह केंद्र शासित प्रदेश जहां
डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) की स्थिति में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। भारत का यह केंद्र शासित प्रदेश जहां आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार की ओर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर गुलाम जम्मू-कश्मीर (POJK) आर्थिक तंगी, राजनीतिक अस्थिरता और लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों का सामना कर रहा है। केंद्र शासित प्रदेश के वित्त पर 2024-25 की CAG (कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर ने पिछले पांच वर्षों में लगातार आर्थिक प्रगति की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्र शासित प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 2020-21 में 1.68 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 2.62 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसी अवधि में प्रति व्यक्ति आय भी 1.01 लाख रुपये से बढ़कर 1.55 लाख रुपये हो गई है। विकास कार्यों पर होने वाले खर्च में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। आर्थिक सेवाओं पर खर्च 2020-21 में 14,842 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 23,257 करोड़ रुपये हो गया, जबकि सामाजिक सेवाओं पर खर्च 21,964 करोड़ रुपये से बढ़कर 28,234 करोड़ रुपये हो गया। साल 2024-25 में कुल खर्च में सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों के खर्च की संयुक्त हिस्सेदारी बढ़कर 62 प्रतिशत हो गई, जो विकास-उन्मुख क्षेत्रों पर अधिक जोर दिए जाने को दर्शाता है। CAG ने यह भी बताया कि कुल खर्च और सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का अनुपात 2020-21 में 37.66 प्रतिशत से घटकर 2024-25 में 31.45 प्रतिशत हो गया। यह दर्शाता है कि जैसे-जैसे समग्र आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं, क्षेत्र की अर्थव्यवस्था सरकारी खर्च पर कम निर्भर होती जा रही है।
इसके विपरीत, पाकिस्तान के कब्ज़े वाला जम्मू-कश्मीर (POJK) लगातार बढ़ती सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। इस इलाके में आधिकारिक बेरोजगारी दर 11 प्रतिशत है, जबकि युवाओं में बेरोजगारी 27 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे पढ़े-लिखे युवा मौकों की तलाश में पलायन कर रहे हैं। गरीबी भी एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। आधिकारिक गरीबी दर 12.65 प्रतिशत है, लेकिन लगातार आर्थिक दबावों के कारण ग्रामीण आबादी का लगभग 18.6 प्रतिशत हिस्सा गरीबी रेखा से नीचे जाने के खतरे का सामना कर रहा है। बिगड़ती आर्थिक स्थिति ने लोगों में व्यापक असंतोष को बढ़ावा दिया है। निवासियों ने बिजली की बढ़ती दरों, खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों और खराब प्रशासन के खिलाफ बार-बार विरोध प्रदर्शन किए हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में, नागरिकों ने पूरे इलाके में शटडाउन, लंबी पदयात्राएं और सविनय अवज्ञा अभियान आयोजित किए हैं। वे सब्सिडी वाले गेहूं के आटे और इलाके के जलविद्युत संसाधनों से पैदा होने वाली बिजली में उचित हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं।
















