Income Tax Notice: UPI, NEFT, RTGS के जरिए बड़े लेनदेन पर जोखिम

अगर आपको लगता है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट केवल बैंक में बड़ी रकम नकद जमा करने पर ही नोटिस भेजता है, तो यह गलत है। upi, neft, rtgs और imps जैसे डिजिटल माध्यमों
अगर आपको लगता है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट केवल बैंक में बड़ी रकम नकद जमा करने पर ही नोटिस भेजता है, तो यह गलत है। UPI, NEFT, RTGS और IMPS जैसे डिजिटल माध्यमों से किए गए लेनदेन भी विभाग की नजर में आ सकते हैं। हालांकि, सिर्फ डिजिटल भुगतान करने से नोटिस नहीं आता। परेशानी तब होती है, जब आपके बैंक लेनदेन, निवेश या खर्च आपकी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में दिखाई गई आय से मेल नहीं खाते। इसलिए सही जानकारी देना और सभी लेनदेन का रिकॉर्ड रखना अत्यंत आवश्यक है।
आजकल अधिकांश लोग UPI, NEFT, RTGS के जरिए भुगतान करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन माध्यमों से पैसा भेजना या प्राप्त करना अपने आप में कोई समस्या नहीं है। लेकिन विभाग का ध्यान इस बात पर रहता है कि आपके लेनदेन आपकी घोषित आय के अनुरूप हैं या नहीं। विभाग AIS, फॉर्म 26AS, स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस (SFT) और अन्य वित्तीय जानकारियों का मिलान करके किसी भी गड़बड़ी की पहचान करता है।
यदि आपके नाम पर TDS कटा है और उसकी जानकारी फॉर्म 26AS या AIS में मौजूद है, लेकिन आपने उस आय को ITR में नहीं दिखाया है, तो नोटिस आ सकता है। इसी प्रकार, बैंक खाते में बार-बार या बड़ी रकम आने के बावजूद ITR में कम आय दिखाना या NEFT और RTGS के जरिए महंगी संपत्ति खरीदना लेकिन उसके लिए आय का सही स्रोत नहीं बताना भी नोटिस का कारण बन सकता है।
बैंक, म्यूचुअल फंड, रजिस्ट्रार, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन विभाग और अन्य संस्थाएं कुछ तय सीमा से ऊपर के लेनदेन की जानकारी SFT के तहत इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को भेजती हैं। टैक्सपेयर्स को समय-समय पर अपना AIS जरूर देखना चाहिए और उसमें दर्ज जानकारी का अपने रिकॉर्ड से मिलान करना चाहिए। यदि कोई गलती दिखे तो AIS में उपलब्ध फीडबैक सुविधा का उपयोग किया जा सकता है।


















