Justice after 7 years: आगरा में किसान को फसल बर्बाद का 1.25 लाख रुपये मिलेगा मुआवजा

आगरा से एक महत्वपूर्ण समाचार सामने आया है, जिसमें उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (द्वितीय) ने एक किसान के पक्ष में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। यह निर्णय उन कि
आगरा से एक महत्वपूर्ण समाचार सामने आया है, जिसमें उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (द्वितीय) ने एक किसान के पक्ष में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। यह निर्णय उन किसानों के लिए एक उम्मीद की किरण है, जो प्राकृतिक आपदाओं के कारण अपनी फसलें खो देते हैं। आयोग ने स्टेट बैंक आफ इंडिया जनरल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया है कि वह पीड़ित किसान रामगोपाल को 1.20 लाख रुपये का मुआवजा और मानसिक उत्पीड़न के लिए पांच हजार रुपये अतिरिक्त प्रदान करे। यह मामला किरावली तहसील के गांव झारौटी का है, जहां किसान ने दिसंबर 2017 में अपनी गेहूं की फसल के लिए बीमा कराया था। हालांकि, भीषण ओलावृष्टि और आंधी के कारण उनकी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। जब किसान ने बीमा कंपनी से मुआवजे का दावा किया, तो कंपनी ने मदद करने के बजाय टालमटोल करना शुरू कर दिया। कंपनी का कहना था कि फसल की उपज में कोई कमी नहीं आई है, इसलिए मुआवजा नहीं दिया जा सकता। इस स्थिति में किसान ने हार नहीं मानी और अगस्त 2019 में उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। इस मामले में लगभग सात वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद, आयोग ने सुनवाई की और साक्ष्यों के आधार पर बीमा कंपनी के दावों को खारिज कर दिया। इस निर्णय ने क्षेत्र के अन्य किसानों में भी उम्मीद जगाई है, जो अक्सर बीमा कंपनियों की मनमानी का शिकार होते हैं। यह निर्णय न केवल रामगोपाल के लिए बल्कि अन्य किसानों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल है। ऐसे मामलों में जहां बीमा कंपनियां अपने दायित्वों से भागती हैं, वहां आयोग का यह निर्णय एक सकारात्मक संकेत है। किसानों को अब उम्मीद है कि वे भी अपनी फसल के नुकसान के लिए उचित मुआवजा प्राप्त कर सकेंगे। इस निर्णय से यह भी स्पष्ट होता है कि उपभोक्ता आयोग किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए तत्पर है और किसी भी प्रकार की अन्याय के खिलाफ खड़ा रहेगा।
















