Serious Crisis: पन्ना टाइगर रिजर्व में रिसोर्ट से वन्यजीवों को खतरा

पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर जोन में एक आलीशान रिसोर्ट का निर्माण वन्यजीवों के लिए गंभीर संकट का कारण बन गया है। यह रिसोर्ट वरिष्ठ आइआरएस अधिकारी बी. श्रीनिवास कुम
पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर जोन में एक आलीशान रिसोर्ट का निर्माण वन्यजीवों के लिए गंभीर संकट का कारण बन गया है। यह रिसोर्ट वरिष्ठ आइआरएस अधिकारी बी. श्रीनिवास कुमार द्वारा नियमों के विरुद्ध तरीके से बनवाया गया है, जिससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन में बाधा उत्पन्न हो रही है। वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए एक महत्वपूर्ण आवागमन मार्ग है और यहां स्थायी निर्माण से उनके प्राकृतिक व्यवहार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। पन्ना टाइगर रिजर्व में केन नदी वन्यजीवों के लिए एक प्रमुख जल स्रोत है, जहां बाघ, तेंदुआ, भालू, चीतल और सांभर जैसे वन्य जीव गर्मियों और अन्य मौसम में नियमित रूप से आते हैं। ऐसे में रिसोर्ट जैसी व्यावसायिक गतिविधियों से वाहन आवाजाही, मानव हस्तक्षेप और ध्वनि प्रदूषण में वृद्धि होने की आशंका है। इसके अलावा, रिसोर्ट में आने वाले पर्यटकों के लिए भी वन्य प्राणियों के हमले का खतरा बढ़ सकता है।
वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञ नरेंद्र बगड़िया और पुष्पेंद्रनाथ द्विवेदी का कहना है कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और वन्यजीव संरक्षण संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुसार कोर क्षेत्र में किसी भी गतिविधि का मूल्यांकन वन्यजीवों पर उसके प्रभाव को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। यदि रिसोर्ट के निर्माण से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन पर असर पड़ रहा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। इस मामले में शिकायत के बाद जांच तो की गई थी, लेकिन वन विभाग ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने इस मामले को लेकर कई बार शिकायतें दर्ज कराईं, जिसके बाद जांच हुई और रिपोर्ट में यह पाया गया कि रिसोर्ट का निर्माण वन भूमि पर किया गया है। इसके बावजूद कार्रवाई में सुस्ती समझ से परे है।
















