Political Alliance Strengthens: राहुल गांधी और अखिलेश यादव की दोस्ती ने फिर पकड़ी रफ्तार

उत्तर प्रदेश की राजनीति में समय-समय पर नए समीकरण बनते और बिगड़ते रहे हैं, लेकिन 2024 में बनी राहुल गांधी और अखिलेश यादव की जोड़ी ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी
उत्तर प्रदेश की राजनीति में समय-समय पर नए समीकरण बनते और बिगड़ते रहे हैं, लेकिन 2024 में बनी राहुल गांधी और अखिलेश यादव की जोड़ी ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं। यह जोड़ी यूपी से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक एक मजबूत राजनीतिक ताकत के रूप में उभरी है। संसद के मॉनसून सत्र में दोनों नेताओं ने एक सुर में पेपर लीक के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरते हुए अपनी एकजुटता दिखाई। जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान भी दोनों नेताओं ने मिलकर पुलिस एक्शन का विरोध किया। एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा निशाना साधा, जिसके जवाब में बीजेपी ने हंगामा खड़ा किया। ऐसे में अखिलेश यादव ने राहुल गांधी का समर्थन करते हुए कहा कि यह गंभीर सवाल हैं जिनका जवाब सरकार को देना होगा। इस प्रकार, यूपी के दो लड़कों की सियासी केमिस्ट्री लोकसभा से सड़क तक दिखाई दे रही है, जो यह संकेत दे रही है कि उनकी राजनीतिक यात्रा लंबी होगी।
राहुल गांधी और अखिलेश यादव की यह दोस्ती केवल संसद में ही नहीं, बल्कि सड़क पर भी सक्रिय नजर आ रही है। पिछले मॉनसून सत्र में भी जब राहुल गांधी ने वोटर वेरिफिकेशन के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरने का प्रयास किया, तो अखिलेश यादव ने खुलकर उनका समर्थन किया। जब भी राहुल गांधी केंद्र सरकार की नीतियों, महंगाई या बेरोजगारी पर आक्रामक तेवर अपनाते हैं, अखिलेश यादव उनके साथ मजबूती से खड़े नजर आते हैं। यह आपसी तालमेल इस बात का गवाह है कि दोनों नेता अब अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर एक साझा राजनीतिक एजेंडे पर काम कर रहे हैं। इस प्रकार, उनकी केमिस्ट्री 2024 के चुनावों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है।
















