Pregnancy Not a Barrier for Government Jobs: गर्भावस्था सरकारी नौकरी पाने में नहीं मानी जा सकती है बाधा, हाई कोर्ट का अहम फैसला

विधि संवाददाता, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि गर्भावस्था किसी महिला को सरकारी नौकरी पाने के अधिकार से वंचित करने
विधि संवाददाता, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि गर्भावस्था किसी महिला को सरकारी नौकरी पाने के अधिकार से वंचित करने का आधार नहीं बन सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी महिला को मातृत्व और रोजगार में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर करना उसके प्रजनन अधिकार और रोजगार के अधिकार, दोनों का उल्लंघन है। यह निर्णय उस समय आया जब एक महिला ने वन रक्षक एवं वन्यजीव रक्षक भर्ती में शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) को गर्भावस्था के कारण स्थगित करने का अनुरोध किया था। कोर्ट ने आयोग के इस अनुरोध को ठुकराने के फैसले को रद कर दिया। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने यह आदेश कोमल जायसवाल की विशेष अपील स्वीकार करते हुए दिया। अपीलार्थी ने वर्ष 2023 की भर्ती में आवेदन किया था। उसने लिखित परीक्षा में सफलता प्राप्त की थी, लेकिन इस साल फरवरी में होने वाली पीईटी से पहले वह नौ माह की गर्भवती थी। उसने 14 किलोमीटर की पैदल परीक्षा स्थगित करने का अनुरोध किया था, लेकिन आयोग ने नियमों का हवाला देते हुए उसकी मांग को अस्वीकार कर दिया। बाद में एकल पीठ ने भी उसकी याचिका खारिज कर दी थी। लेकिन दो जजों की पीठ ने एकल पीठ के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि महिला का विवाहित होना या गर्भवती होना नियुक्ति के लिए अयोग्यता नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि नियमों में पीईटी स्थगित करने पर रोक नहीं है तो आयोग को मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए था। अदालत ने यह भी कहा कि भर्ती प्रक्रिया में विज्ञापन और लिखित परीक्षा के बीच दो वर्ष से अधिक का अंतर रहा, जिसके दौरान विवाह और गर्भधारण होना स्वाभाविक था। कोर्ट ने आयोग को चार सप्ताह के भीतर अपीलार्थी की पीईटी कराने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा कि यदि वह पीईटी, चिकित्सीय परीक्षण और मेरिट में सफल होती है तो उसे उसी तिथि से नियुक्ति का लाभ दिया जाए, जिस दिन उससे कम मेरिट वाले अभ्यर्थी को नियुक्ति मिली हो। तब तक ओबीसी महिला वर्ग का एक पद रिक्त रखने का भी आदेश दिया गया है।
















