Property Rights: 42% Women Own Homes, 32% Own Land, Men Lead

भारत में महिलाओं की संपत्ति के मालिकाना हक की स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है। हाल ही में राज्यसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 15 से 49 वर्ष की आयु वर्ग की
भारत में महिलाओं की संपत्ति के मालिकाना हक की स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है। हाल ही में राज्यसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 15 से 49 वर्ष की आयु वर्ग की 42.3 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं, जिनके पास घर अकेले या संयुक्त रूप से उनके नाम है। जबकि इसी आयु वर्ग के पुरुषों में यह आंकड़ा 60.1 फीसदी है, जो दर्शाता है कि घर के मालिकाना हक में महिलाएं पुरुषों से काफी पीछे हैं।
जमीन के मामले में भी स्थिति में सुधार की आवश्यकता है। आंकड़ों के अनुसार, 15 से 49 वर्ष की केवल 31.7 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं, जिनके पास जमीन अकेले या संयुक्त रूप से है। वहीं, पुरुषों में यह आंकड़ा 42.3 फीसदी है। यह दर्शाता है कि महिलाओं और पुरुषों के बीच जमीन के मालिकाना हक में 10.6 प्रतिशत का अंतर है। ये आंकड़े नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (NFHS-5) के हैं, जो 2019-21 के दौरान एकत्रित किए गए थे।
महिलाओं के संपत्ति के अधिकारों का सीधा संबंध उनकी आर्थिक सुरक्षा और फैसले लेने की क्षमता से भी होता है। अगर किसी महिला के नाम पर घर या जमीन है, तो यह उसके परिवार और समाज में आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकता है। इसके बावजूद, सरकारी आंकड़े बताते हैं कि घर और जमीन के मामले में पुरुषों का हिस्सा महिलाओं से अधिक है।
सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के नाम संपत्ति बढ़ाने के लिए कई योजनाओं और नियमों पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में घर महिला के नाम या पति-पत्नी के संयुक्त नाम पर देने का प्रावधान है। वहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी में परिवार की महिला मुखिया को घर का मालिक या सह-मालिक बनाने का प्रावधान रखा गया है।
















