Supreme Court denies relief to Ashish Mishra: लखीमपुर खीरी हिंसा के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को जमानत में ढील देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को जमानत की शर्तों में और ढील देने से इनकार कर दिया है। यह निर्णय गुरुवार को लिया गया, जब क
सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को जमानत की शर्तों में और ढील देने से इनकार कर दिया है। यह निर्णय गुरुवार को लिया गया, जब कोर्ट ने मिश्रा की अपील पर विचार करने का कोई आधार नहीं पाया। आशीष मिश्रा, जो पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा (टेनी) के बेटे हैं, 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में मुख्य आरोपी हैं।
कोर्ट की पीठ में सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना शामिल थे। उन्होंने मिश्रा की जमानत की शर्तों में ढील देने की अपील को खारिज करते हुए कहा कि इस स्तर पर इस प्रार्थना पर विचार करने का कोई आधार नहीं है। इससे पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2022 में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जबकि निचली अदालत ने दिसंबर 2022 में उनके और 13 अन्य लोगों के खिलाफ हत्या के आरोप तय किए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2023 में मिश्रा को आठ सप्ताह के लिए अंतरिम जमानत दी थी, लेकिन इस साल की शुरुआत में पारिवारिक समारोहों में शामिल होने के लिए की गई अपील को भी खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान, शिकायतकर्ताओं के अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने मुकदमे की कार्यवाही पर चिंता व्यक्त की और आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण गवाहों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
इसके साथ ही, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लखनऊ में जिला एवं सेशन कोर्ट के पास स्थित 72 अवैध वकील चैंबरों को ध्वस्त करने का आदेश दिया है। जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राजीव भारती ने वकीलों को चेतावनी दी है कि यदि वे अतिक्रमण हटाने में बाधा डालते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

















