Supreme Court: पर्यावरण मंजूरी से जुड़े मामले में आज आएगा अहम फैसला

सुप्रीम कोर्ट बुधवार को पूर्वव्यापी पर्यावरण मंजूरियों से संबंधित याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाने जा रहा है। यह याचिकाएं उन परियोजनाओं से जुड़ी हैं जिन्होंने हरित
सुप्रीम कोर्ट बुधवार को पूर्वव्यापी पर्यावरण मंजूरियों से संबंधित याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाने जा रहा है। यह याचिकाएं उन परियोजनाओं से जुड़ी हैं जिन्होंने हरित मानदंडों का उल्लंघन किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्याबागची तथा जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ 49 याचिकाओं पर फैसला सुनाएगी। इस मामले में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रही अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने सरकार के कार्यालय ज्ञापन का बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह पूर्वव्यापी पर्यावरण मंजूरी देता है, लेकिन यह 'एकमुश्त' नियमितीकरण नहीं है। भाटी ने तर्क किया कि सरकार पर्यावरण संबंधी न्यायशास्त्र को कमजोर करने की कोई सिफारिश नहीं करती है और कानून के दायरे का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने नियामक व्यवस्थाओं के विकास को भी समझाया, यह बताते हुए कि पहले जिन उद्योगों को मंजूरी नहीं चाहिए थी, उन्हें अब हरित कानूनों के दायरे में लाया गया है। भाटी ने कहा कि कानूनी रूप से संचालित होने वाली इकाइयों को पहले बंद करना होगा, फिर विशेषज्ञ मूल्यांकन से गुजरना होगा, भारी जुर्माना देना होगा और पिछले नुकसान के लिए उपचारात्मक योजना प्रस्तुत करनी होगी।
वहीं, इस मामले में विरोध में विभिन्न पक्षों के वकीलों ने पूर्वव्यापी मंजूरियों का विरोध किया। वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन और संजय पारिख ने कहा कि सरकारी अधिकारियों को मानदंडों का उल्लंघन करने की छूट नहीं दी जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि वे जुर्माने का भुगतान करके बाद में अनुमति मिलने की उम्मीद नहीं कर सकते। वकील सृष्टि अग्निहोत्री ने इस विचार का विरोध करते हुए कहा कि परियोजनाओं को 'प्राथमिक' पर्यावरण मंजूरी देना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय है। उन्होंने तर्क किया कि 'प्रदूषणकर्ता भुगतान करे' के सिद्धांत को 'प्रदूषण करो और भुगतान करो' तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। अग्निहोत्री ने पर्यावरण संरक्षण पर रियो घोषणा और अन्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का भी हवाला दिया।
















