70 Years of Neglect for Martyr Thakur Roshan Singh's Village: योगी सरकार ने बदल दी यहां की तस्वीर

अमर शहीद क्रांतिकारी ठाकुर रोशन सिंह की जन्मभूमि नवादा गांव ने वर्षों तक विकास की मुख्यधारा से कटे रहने का दर्द सहा है। आजाद भारत में भी तीन पीढ़ियों ने हर साल
अमर शहीद क्रांतिकारी ठाकुर रोशन सिंह की जन्मभूमि नवादा गांव ने वर्षों तक विकास की मुख्यधारा से कटे रहने का दर्द सहा है। आजाद भारत में भी तीन पीढ़ियों ने हर साल बारिश के मौसम में गांव की कठिनाइयों का सामना किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब इस मामले को संज्ञान में लिया, तो खन्नौत नदी पर पक्के पुल का निर्माण कराया। यह सिर्फ एक पुल का उद्घाटन नहीं था, बल्कि शहादत को मिले सम्मान का प्रतीक था। ठाकुर रोशन सिंह का जन्म 19 दिसंबर 1892 को नवादा गांव में हुआ था। वह बचपन से ही साहसी और कुशल पहलवान थे। उन्होंने महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में भाग लिया और बाद में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (एचआरए) के सक्रिय सदस्य बने। 1922 में बरेली में हुए प्रदर्शन के दौरान उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया। इसके बाद उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया और अंततः 19 दिसंबर 1927 को फांसी की सजा सुनाई गई। स्वतंत्रता के बाद, नवादा गांव दशकों तक बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहा। खन्नौत नदी पर पुल न होने के कारण गांव हर वर्ष बाढ़ से प्रभावित होता रहा। 25 फरवरी 2018 को, मुख्यमंत्री ने गांव में विकास परियोजनाओं की घोषणा की और 30 दिसंबर 2018 को खुद गांव पहुंचकर शहीद की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की। खन्नौत नदी पर बना पुल अब गांव के लिए एक नई जिंदगी बन चुका है। यह कहानी केवल एक पुल की नहीं, बल्कि बलिदान और सम्मान की है।
















