Use of Banned App Continues: वारिस पंजाब दे के सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद जंगी एप का मामला सामने आया

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। हाल ही में अलगाववादी और आतंकी संगठन अपने नेटवर्क को बढ़ाने के लिए प्रतिबंधित जंगी एप्लीकेशन का उपयोग कर रहे हैं। बहराइच के रूपईडीहा एकीकृत च
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। हाल ही में अलगाववादी और आतंकी संगठन अपने नेटवर्क को बढ़ाने के लिए प्रतिबंधित जंगी एप्लीकेशन का उपयोग कर रहे हैं। बहराइच के रूपईडीहा एकीकृत चेक पोस्ट (आईसीपी) से 23 जुलाई को गिरफ्तार किए गए वारिस पंजाब दे के सक्रिय सदस्य मनबीर सिंह ढिल्लो और विक्रमजीत सिंह इसी एप के माध्यम से पंजाब में अपने नेटवर्क को मजबूत कर रहे थे। यह एप्लीकेशन पाकिस्तान के गैंगस्टर शहजाद भट्टी द्वारा भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जो संदिग्ध आतंकियों के साथ संपर्क में रहता है। भारत सरकार ने इस एप को प्ले स्टोर से प्रतिबंधित कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद इसका उपयोग जारी है। यह एप मोबाइल पर डाउनलोड करने के बाद एक यूनिक आईडी तैयार करता है, जो फोन नंबर की तरह काम करता है और उपयोगकर्ता की पहचान को छिपाने में मदद करता है। इस एप पर प्रोफाइल बनाने के लिए कोई भी नाम रखा जा सकता है, जिससे पहचान उजागर नहीं होती है।
इस एप के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को एसएमएस, ऑडियो और वीडियो कॉल करने की सुविधा मिलती है। चूंकि इसका कोई सर्वर नहीं है, इसलिए यदि मोबाइल से डेटा डिलीट कर दिया जाए तो उसे आसानी से रिकवर नहीं किया जा सकता है। झारखंड के उग्रवादी संगठनों और नशा तस्करों के बाद अब आतंकी और अलगाववादी संगठनों द्वारा इस एप के उपयोग का मामला सामने आया है, जिससे सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। भारत-नेपाल सीमा से गिरफ्तार किए गए वारिस पंजाब दे के सदस्य मनबीर और विक्रमजीत भी इसी एप के जरिए पंजाब और अन्य राज्यों में अपने नेटवर्क को तैयार कर रहे थे। इस जानकारी के सामने आने के बाद आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
















