Water Supply Reaches Every Home: क्या हर घर में पानी पीने लायक है? 3 साल में करोड़ों सैंपल की जांच में क्या निकला

सरकार के आंकड़ों के अनुसार, जलजीवन मिशन के तहत अब तक करीब 82 फीसदी ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन मिल चुका है। मिशन की शुरुआत के समय देश में केवल 3.24 करोड़ ग्र
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, जलजीवन मिशन के तहत अब तक करीब 82 फीसदी ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन मिल चुका है। मिशन की शुरुआत के समय देश में केवल 3.24 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल से पानी की सुविधा प्राप्त थी, जो कि कुल ग्रामीण परिवारों का 16.72 फीसदी था। अब 18 जुलाई 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 15.89 करोड़ यानी 82.09 फीसदी हो गया है। इस दौरान ग्रामीण नल कनेक्शन का कवरेज लगभग पांच गुना बढ़ा है।
सरकार पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए दो प्रकार की व्यवस्थाएं अपनाती है। पहली, लैबोरेटरी में पानी के सैंपल की जांच और दूसरी, फील्ड टेस्टिंग किट्स (FTK) के माध्यम से मौके पर पानी की गुणवत्ता की जांच। दोनों माध्यमों से मिलाकर 5.39 करोड़ से अधिक सैंपल की जांच की जा चुकी है।
राज्य के स्तर पर उत्तर प्रदेश में पिछले चार साल में FTK के जरिए करीब 91 लाख से अधिक सैंपल की जांच हुई है। 2023-24 में यूपी में प्रयोगशालाओं में 6,23,246 सैंपल की जांच हुई, जबकि FTK से 35,89,028 सैंपल टेस्ट किए गए। 2024-25 में लैब जांच बढ़कर 6,78,899 हुई, जबकि FTK से जांच का आंकड़ा 38,34,685 हो गया। 2025-26 में यूपी में 8,25,798 सैंपल प्रयोगशालाओं में और 10,26,956 सैंपल FTK के जरिए जांचे गए।
अन्य राज्यों की स्थिति भी ध्यान देने योग्य है। पानी की जांच में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है, इसके बाद कर्नाटक, असम, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश का नंबर आता है। प्रयोगशाला जांच में तमिलनाडु ने चार वर्षों में 30.53 लाख सैंपल टेस्ट किए। हालांकि, लगभग 24% सैंपल तय मानकों से नीचे पाए गए। सरकार ने निर्देश दिया है कि बैक्टीरियल कंटैमिनेशन पाए जाने पर 24 घंटे के भीतर कार्रवाई की जाए।
















