Wildlife Damage Compensation Increased: मुजफ्फरपुर में घोड़परास व जंगली सूअर से जान-माल और पालतू जानवरों के नुकसान पर अब दोगुना मुआवजा

मुजफ्फरपुर में घोड़परास और जंगली सूअर जैसे वन्यजीवों के कारण होने वाले जान-माल और पालतू पशुओं के नुकसान के लिए अब सरकार ने मुआवजा राशि को दोगुना करने का निर्णय
मुजफ्फरपुर में घोड़परास और जंगली सूअर जैसे वन्यजीवों के कारण होने वाले जान-माल और पालतू पशुओं के नुकसान के लिए अब सरकार ने मुआवजा राशि को दोगुना करने का निर्णय लिया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने गैर-वन क्षेत्रों में वन्यजीवों से होने वाली क्षति के लिए मिलने वाली सहायता राशि में वृद्धि की है। इस निर्णय के तहत, अब यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु बाघ, तेंदुआ, हाथी, भालू, नीलगाय या जंगली सूअर जैसे वन्यजीवों के कारण होती है, तो पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। पहले यह राशि केवल 5 लाख रुपये थी। डीएफओ नरिंदर पाल सिंह ने कहा कि मुआवजा राशि बढ़ाने का उद्देश्य पीड़ितों को राहत प्रदान करना है। इससे किसानों और ग्रामीणों को वन्यजीवों के हमलों से होने वाले नुकसान के खिलाफ बेहतर सुरक्षा मिलेगी।
इसके अलावा, ग्राम पंचायत मुखिया को नीलगाय और जंगली सूअर के आखेट की अनुमति देने का अधिकार भी दिया गया है। यह अनुमति किसानों के आवेदन पर दी जाएगी, जिसके लिए वन पदाधिकारी, किसान और ग्रामीणों के साथ मिलकर स्थल निरीक्षण कर पंचनामा तैयार करना होगा। इस प्रक्रिया में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शिकार केवल लाइसेंसी निशानेबाज द्वारा किया जाए। एक बार में अधिकतम 50 जानवरों के आखेट की अनुमति दी जाएगी, लेकिन शावक और गर्भवती मादा का शिकार पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। यह निर्णय किसानों की फसल और जान-माल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि वे वन्यजीवों के हमलों से सुरक्षित रह सकें।
















