20-Year-Old Rape Case Acquitted: हाईकोर्ट ने रद्द की सजा, कहा- आरोप संदेह से परे साबित नहीं

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में करीब 20 साल पुराने दुष्कर्म मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सात-स
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में करीब 20 साल पुराने दुष्कर्म मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सात-सात वर्ष की कठोर कारावास की सजा को रद्द करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा कि महिला के साथ बने शारीरिक संबंध उसकी इच्छा के विरुद्ध और बिना सहमति के थे। जस्टिस रूपिंदरजीत चाहल की पीठ ने कपूरथला निवासी अवतार सिंह उर्फ काला की अपील को स्वीकार करते हुए वर्ष 2004 में फास्ट ट्रैक अदालत द्वारा दिए गए दोषसिद्धि आदेश को निरस्त कर दिया। निचली अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और 450 के तहत दोषी ठहराया था। अभियोजन के अनुसार, 5-6 फरवरी 2004 की रात आरोपी ने दीवार फांदकर महिला के घर में घुसकर किरपान दिखाकर उसे धमकाया और दुष्कर्म किया। महिला के शोर मचाने पर उसके सास-ससुर मौके पर पहुंचे, लेकिन आरोपी वहां से भागने में सफल रहा। यह मामला तब से चर्चा में है और अब हाईकोर्ट के निर्णय ने इसे एक नया मोड़ दिया है।
सुनवाई के दौरान आरोपी ने यह स्वीकार किया कि उसके और महिला के बीच शारीरिक संबंध बने थे, लेकिन उसने यह भी कहा कि यह संबंध सहमति से बने थे। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि बिना सहमति के संबंध साबित करने की जिम्मेदारी अभियोजन की थी। अदालत ने यह भी पाया कि महिला द्वारा संघर्ष और किरपान से चोट लगने का दावा मेडिकल रिपोर्ट से पुष्ट नहीं हुआ। इसके अलावा, ससुर के बयान में भी चोट का जिक्र नहीं था। इस प्रकार, अदालत ने पाया कि अभियोजन की कहानी में कई ऐसे तत्व हैं जो संदेह पैदा करते हैं। घटना के समय कमरे में बच्चे और पास में सास-ससुर होने के बावजूद तत्काल हस्तक्षेप के ठोस साक्ष्य भी सामने नहीं आए, जिससे अभियोजन की कहानी की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है।
















