Article 370 Abolished: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म हो गया, लेकिन PM मोदी-शाह ने क्यों इस कानून को छुआ तक नहीं!

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के समाप्त होने के बाद, चिनार के पेड़ों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून की चर्चा ने एक बार फिर से ध्यान आकर्षित किया है। 5 अगस्त 20
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के समाप्त होने के बाद, चिनार के पेड़ों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून की चर्चा ने एक बार फिर से ध्यान आकर्षित किया है। 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A को खत्म कर दिया, जो कि भारत के सबसे बड़े संवैधानिक परिवर्तनों में से एक माना गया। इस बदलाव के बीच एक ऐसा कानून भी है जो कश्मीर की पहचान से जुड़ा हुआ है और जिस पर सरकार ने कोई बदलाव नहीं किया। यह कानून है 'Jammu and Kashmir Preservation of Specified Trees Act, 1969', जो चिनार के पेड़ों को बिना सरकारी अनुमति के काटने या नुकसान पहुंचाने से रोकता है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के अनुसार, कश्मीर में चिनार का सबसे पुराना पेड़ 647 वर्ष पुराना है, जो बड़गाम के चत्तरग्राम में स्थित है। चिनार की छांव तले प्रेम की कहानियाँ और लोककथाएँ सदियों से जीवित हैं। चिनार का पेड़ कश्मीर की पहचान है और इसकी पत्तियों का रंग बदलना एक अद्भुत दृश्य है। गर्मियों में गहरे हरे रंग से लेकर पतझड़ में लाल, पीले और एम्बर रंग में बदलने की प्रक्रिया इसे और भी खास बनाती है। चिनार का पेड़ न केवल कश्मीर की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है, बल्कि यह स्थानीय पर्यावरण की रक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस कानून के तहत चिनार के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई को रोकने का प्रयास किया गया है। यह कानून कश्मीर की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा के लिए बनाया गया था। चिनार का पेड़ कश्मीर के बगीचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसकी संख्या लगातार घट रही थी। इसलिए सरकार के लिए इसे खत्म करने का कोई तर्क नहीं था। चिनार की पत्तियों का बदलता रंग और इसकी लंबी उम्र इसे और भी खास बनाती है। जानकारों के अनुसार, चिनार को अपनी पूरी ऊंचाई तक पहुंचने में 30 से 50 साल और अपनी पूरी मजबूती और आकार पाने में लगभग 100-150 साल लगते हैं। मुगलों के समय से ही चिनार का पेड़ कश्मीर की पहचान बना हुआ है। अकबर ने डल झील के किनारे 1100 से अधिक चिनार के पेड़ लगवाए थे। चिनार का पेड़ कश्मीर की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा है और इसकी सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून ने इसे एक नई पहचान दी है।
















