BBMB Payment Dispute: हिमाचल को पंजाब और हरियाणा देंगे 12 हजार मिलियन यूनिट बिजली

भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) परियोजनाओं से संबंधित हिमाचल प्रदेश के बकाया भुगतान की मांग अब पूरी होने की दिशा में बढ़ रही है। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) परियोजनाओं से संबंधित हिमाचल प्रदेश के बकाया भुगतान की मांग अब पूरी होने की दिशा में बढ़ रही है। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को केंद्र सरकार ने बताया कि इस बकाया भुगतान के लिए एक नए कैशलेस फार्मूले पर बातचीत चल रही है, जिससे साझेदार राज्यों के बीच एक सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला जा सकेगा। यह विवाद 1966 से लंबित है और अब इसके समाधान की संभावना बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार, बीबीएमबी ने 1 नवंबर, 2011 के बाद से हिमाचल प्रदेश की बिजली का 7.19 प्रतिशत हिस्सा चुकाया है, जबकि पंजाब और हरियाणा ने बीबीएमबी परियोजनाओं के लिए 13,066 मिलियन यूनिट का बकाया नहीं चुकाया है। इस बकाया भुगतान के लिए केंद्र ने एक नया प्रस्ताव रखा है, जिसमें कहा गया है कि पंजाब और हरियाणा हिमाचल को ऊर्जा के रूप में भुगतान करेंगे।
केंद्र के इस प्रस्ताव के तहत, यह तय किया गया है कि हिमाचल प्रदेश अब पंजाब और हरियाणा को 420 करोड़ रुपये का बकाया नहीं चुकाएगा। यह राशि 13,066 मिलियन यूनिट बिजली के समायोजन के रूप में ली जाएगी। केंद्र का सुझाव है कि पंजाब और हरियाणा द्वारा हिमाचल को भुगतान मौद्रिक रूप में नहीं होगा, बल्कि 12,000 मिलियन यूनिट बिजली के रूप में होगा। इससे हिमाचल प्रदेश को 400 करोड़ रुपये की पूंजी लागत का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। इस प्रस्ताव पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीशों जायमाल्या बागची और वी. मोहन की पीठ ने सुनवाई की। उन्होंने रिकार्ड किया कि हिमाचल और हरियाणा सरकारें इस प्रस्ताव पर सिद्धांत रूप में सहमत हो गई हैं।
हालांकि, पंजाब सरकार ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। सर्वोच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि उसे अदालत के आदेश का पालन नहीं करने की आदत है। पंजाब सरकार को इस प्रस्ताव पर अपना रुख स्पष्ट करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को निर्धारित की गई है। इस विवाद का समाधान न केवल हिमाचल प्रदेश के लिए बल्कि पंजाब और हरियाणा के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे बिजली के बकाया भुगतान का मुद्दा सुलझेगा और भविष्य में ऊर्जा के वितरण में पारदर्शिता आएगी।
















