Bihar's Liquor Ban Review: भाजपा के लिए मुश्किल फैसला, नई रिपोर्ट से बहस छिड़ी

सत्तारूढ़ भाजपा के एक सूत्र के अनुसार, पार्टी जानती है कि शराब की बिक्री दोबारा शुरू करने से राज्य के राजस्व में बड़ा इजाफा हो सकता है। लेकिन पार्टी यह भी समझती
सत्तारूढ़ भाजपा के एक सूत्र के अनुसार, पार्टी जानती है कि शराब की बिक्री दोबारा शुरू करने से राज्य के राजस्व में बड़ा इजाफा हो सकता है। लेकिन पार्टी यह भी समझती है कि शराबबंदी नीति में बदलाव करने से पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भावनाएं आहत हो सकती हैं। इसलिए भाजपा इस नीति की समीक्षा में जल्दबाजी नहीं कर रही है।
आरजेडी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुबोध कुमार मेहता के अनुसार, यह अध्ययन राज्य सरकार की पूर्ण विफलता को उजागर करता है। जेडीयू (JD(U)) का आधिकारिक रुख अब भी शराबबंदी के समर्थन में है, लेकिन पार्टी के सीतामढ़ी से सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने इस नीति की समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि शराबबंदी कहीं भी सफल नहीं हुई है।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने कहा कि राज्य का राजस्व बढ़ाने के उपाय खोजने होंगे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि शराबबंदी हटा दी जाए। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने सुझाव दिया कि बिहार को गुजरात मॉडल अपनाना चाहिए, जहां शराबबंदी को सख्ती से लागू किया जाता है।
हालांकि, सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर शराबबंदी को लेकर गंभीर चर्चा चल रही है। सूत्रों के अनुसार, शराबबंदी के बाद अवैध नशीले पदार्थों के इस्तेमाल में तेजी आई है और समानांतर अवैध शराब का कारोबार भी खड़ा हो गया है। अगर बिहार में होटल और पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देना है, तो कम से कम आंशिक रूप से शराब की बिक्री की अनुमति देनी होगी।














