Telangana DGP visits Naxal stronghold: 50 साल बाद कार्रेगुट्टा पहुंचे तेलंगाना के डीजीपी

तेलंगाना के डीजीपी सीवी आनंद ने सोमवार को कार्रेगुट्टा की पहाड़ियों का दौरा किया। यह पिछले पांच दशकों में किसी भी पुलिस महानिदेशक का इस क्षेत्र में पहला कदम था,
तेलंगाना के डीजीपी सीवी आनंद ने सोमवार को कार्रेगुट्टा की पहाड़ियों का दौरा किया। यह पिछले पांच दशकों में किसी भी पुलिस महानिदेशक का इस क्षेत्र में पहला कदम था, जो माओवादी गतिविधियों के लिए जाना जाता है। डीजीपी ने कहा कि इस क्षेत्र को जल्द ही एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जंगल में जाने के लिए जो रास्ता बनाया गया है, वह अभी कच्चा है, जिसे डामर की सड़क में परिवर्तित किया जाएगा ताकि स्थानीय लोग बिना किसी बाधा के यहां आ सके।
आनंद ने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यटन के विकास से उन माओवादियों को मदद मिलेगी जो आत्मसमर्पण कर चुके हैं और समाज में एक नई शुरुआत करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को एकमुश्त अनुदान राशि दी जाती है और उनके सिर पर घोषित इनामी राशि भी प्रदान की जाती है। इस दौरे के दौरान उनके साथ पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे।
डीजीपी ने बताया कि तेलंगाना पुलिस ने ऑपरेशन कागार के तहत व्यापक स्तर पर सहयोग किया है, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 700 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि अब केवल दो से तीन शीर्ष माओवादी ही फरार हैं, जिनमें प्रमुख नाम मुप्पला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति का है। डीजीपी ने गणपति से अपील की कि वे आत्मसमर्पण करें और समाज की मुख्यधारा में शामिल हों।
मुप्पला लक्ष्मण राव सीपीआई (माओवादी) के पूर्व महासचिव रहे हैं। उनके बाद नंबला केशव राव उर्फ बसावराजू ने संगठन की कमान संभाली थी। बासावराजू के निधन के बाद माओवादी पार्टी दो गुटों में बंट गई। एक गुट का नेतृत्व मल्लो जुला वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू और दूसरे का नेतृत्व थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी कर रहे थे। दोनों के बीच संगठन के भविष्य को लेकर मतभेद उत्पन्न हुए, जिसके बाद सोनू और उनके कई साथियों ने आत्मसमर्पण किया।















