Border Security Measures: पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या में कमी

पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने इस फेंसिंग के लिए अधिग्रहित भूमि का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा गृह
पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने इस फेंसिंग के लिए अधिग्रहित भूमि का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा गृह मंत्रालय को सौंप दिया है। इस प्रक्रिया के तहत अब तक एक लाख से अधिक बांग्लादेशी नागरिक पश्चिम बंगाल छोड़ चुके हैं। इसके अलावा, SIR प्रक्रिया में दोबारा आवेदन नहीं करने वाले लगभग 20 लाख लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। इस बीच, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने NCPI के सभी 20 सांसदों के साथ बंग भवन में दोपहर का भोजन किया, जिसमें कई राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की गई।
राज्य सरकार के सूत्रों के अनुसार, भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग के लिए अधिग्रहित भूमि का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा गृह मंत्रालय को सौंपा जा चुका है। इस भूमि के हस्तांतरण के बाद, भारत-बांग्लादेश सीमा के विभिन्न हिस्सों में फेंसिंग का कार्य तेजी से चल रहा है। इससे पहले, 22 जुलाई को राज्य सरकार ने BSF को लगभग 1,024.75 एकड़ भूमि सौंपने की जानकारी दी थी। यह भूमि नौ जिलों में सीमा पर फेंसिंग के लिए दी गई है, जिनमें मुर्शिदाबाद, उत्तर 24 परगना, कूचबिहार, मालदा, नदिया, दक्षिण दिनाजपुर, दार्जिलिंग, उत्तर दिनाजपुर और जलपाईगुड़ी शामिल हैं। कुल 172.6 किलोमीटर सीमा क्षेत्र में फेंसिंग के लिए भूमि का हस्तांतरण किया गया है।
मुर्शिदाबाद में सबसे अधिक भूमि फेंसिंग के लिए दी गई है, जहां लगभग 45.4 किलोमीटर सीमा पर 337 एकड़ भूमि का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, उत्तर 24 परगना में 42.07 किलोमीटर क्षेत्र के लिए 241.03 एकड़ भूमि का भी समावेश किया गया है। SIR प्रक्रिया में जिन लोगों का नाम शामिल नहीं हो पाया और जिन्होंने दोबारा आवेदन नहीं किया, उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई हो सकती है। ऐसे लोगों की संख्या लगभग 20 लाख बताई जा रही है। इस बीच, सीमा सुरक्षा और घुसपैठ के मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है। फेंसिंग के कार्य के साथ-साथ, SIR प्रक्रिया से जुड़े लोगों की समस्याएं भी सामने आ रही हैं, जिससे आने वाले दिनों में यह मुद्दा पश्चिम बंगाल की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।
















