Court Ruling on Muslim Employee's Pension: मुस्लिम कर्मचारी की दूसरी पत्नी को भी मिलेगा फैमिली पेंशन का अधिकार

पटना हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि जब तक देश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू नहीं होती, तब तक मुस्ल
पटना हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि जब तक देश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू नहीं होती, तब तक मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत वैध दूसरी शादी करने वाली पत्नी को फैमिली पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता। इस निर्णय ने न केवल मुस्लिम समुदाय के भीतर विवाह संबंधों को प्रभावित किया है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल भी स्थापित करता है। अदालत ने लखीसराय की निवासी नजमा खातून की याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे दो सप्ताह के भीतर फैमिली पेंशन की स्वीकृति की प्रक्रिया को पूरा करें। यह फैसला उन महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत है जो अपने पति की मृत्यु के बाद आर्थिक सुरक्षा की तलाश में हैं।
न्यायाधीश पूर्णेंदु सिंह की एकलपीठ ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता लागू करने की परिकल्पना करता है, लेकिन जब तक इस संबंध में कोई कानून नहीं बनता, तब तक मुस्लिम पर्सनल लॉ ही लागू रहेगा। याचिकाकर्ता नजमा खातून ने अदालत को बताया कि उनके पति, सरकारी कर्मचारी स्व. मोहम्मद उस्मान का 14 अक्टूबर 2024 को निधन हो गया था। उन्होंने अपनी दूसरी पत्नी के रूप में फैमिली पेंशन और बकाया राशि के भुगतान की मांग की थी। यह मामला तब और जटिल हो गया जब राज्य सरकार ने यह तर्क दिया कि दूसरी शादी के लिए विभागीय अनुमति का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
















