Confidential Survey in UP: बीजेपी का गोपनीय 'सुपर सर्वे', 61 हारी हुई सीटों के लिए तैयार हो रहा मास्टर प्लान!

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एक गोपनीय सर्वे की चर्चा जोरों पर है। इस सर्वे का उद्देश्य 61 हारी हुई सीटों के लिए एक मास्टर प्लान तैयार करना ह
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एक गोपनीय सर्वे की चर्चा जोरों पर है। इस सर्वे का उद्देश्य 61 हारी हुई सीटों के लिए एक मास्टर प्लान तैयार करना है। बीजेपी इस सर्वे को तीन स्तरों पर संचालित कर रही है, जिसमें मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन, जनाधार और जीत की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत, पार्टी ने उन सीटों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है जहां वह पिछले चुनावों में हार चुकी है। विपक्षी दल भले ही बीजेपी की तैयारियों को नजरअंदाज कर रहे हों, लेकिन पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं और जनता के फीडबैक के आधार पर अगली चुनावी रणनीति बनाने का निर्णय लिया है।
बीजेपी के सूत्रों के अनुसार, इस सर्वे में न केवल पार्टी की अपनी सीटों का आकलन किया जा रहा है, बल्कि गठबंधन में शामिल अन्य दलों जैसे निषाद पार्टी, अपना दल, लोकदल और एसबीएसपी की सीटों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। पूर्वी यूपी के आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर की 22 सीटें ऐसी हैं जहां बीजेपी लगातार हार रही है। इसी तरह पश्चिमी यूपी में सहारनपुर, मुरादाबाद, बिजनौर जिलों की 13 मुस्लिम दलित बहुल सीटें भी हैं जहां बीजेपी को सफलता नहीं मिली है। इसके अलावा, अवध और मध्य यूपी के रायबरेली, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, बाराबंकी, उन्नाव, हरदोई, फतेहपुर और अंबेडकरनगर जैसे जिलों की 26 सीटें भी बीजेपी के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
बीजेपी की चुनावी तैयारी का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं की दक्षता मापने के लिए परीक्षाएं आयोजित की हैं। हाल ही में, यूपी में बीजेपी संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के लिए ऑनलाइन परीक्षा का आयोजन किया गया था। इस परीक्षा में पार्टी के इतिहास और कार्यसंस्कृति से संबंधित प्रश्न पूछे गए थे। पूरे देश के बीजेपी कार्यकर्ताओं ने इस परीक्षा में भाग लिया, जिसमें यूपी के कार्यकर्ताओं ने अव्वल स्थान प्राप्त किया। इस परीक्षा में 5.34 लाख कार्यकर्ताओं ने भाग लिया, जिनमें से 4.82 लाख कार्यकर्ता सफल रहे। यूपी के 90 प्रतिशत से अधिक कार्यकर्ताओं ने सफलता हासिल की, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बीजेपी चुनावी तैयारी में किसी भी तरह की कमी नहीं छोड़ना चाहती।
















