Court Orders Report on Women's Prison Safety: महिला कैदियों की सुरक्षा पर कलकत्ता हाई कोर्ट का सख्त आदेश

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने महिला कैदियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए जेलों में निगरानी व्यवस्था, प्रवेश-निकास पर नियंत्रण और
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने महिला कैदियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए जेलों में निगरानी व्यवस्था, प्रवेश-निकास पर नियंत्रण और सीसीटीवी कैमरों की स्थिति पर राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने यह निर्देश उस समय दिया जब सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि सात सुधार गृहों में कुल 15 महिला कैदी यौन रोग से पीड़ित हैं। हालांकि, राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया कि ये महिलाएं जेल में आने से पहले ही संक्रमित थीं और उनका उपचार जारी है। अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सुधार गृहों के बुनियादी ढांचे और बंदियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं।
सुनवाई के दौरान मित्र अधिवक्ता तापस भंज ने अदालत में कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कई सुधार गृहों में महिला और पुरुष बंदियों के आने-जाने के रास्तों पर निगरानी की कमी है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ जेलों में बंदियों से 'प्रोटेक्शन मनी' वसूली के लिए प्रताड़ित किया जाता है, जो कि एक गंभीर मुद्दा है। इस प्रकार के आरोप जेलों के भीतर सुरक्षा और मानवाधिकारों के उल्लंघन की ओर इशारा करते हैं। अदालत ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से इस पर स्पष्टीकरण मांगा है।
राज्य के कारागार विभाग ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जेलों के प्रवेश और निकास स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। हालांकि, कुछ जेलों में रखरखाव कार्य के कारण कुछ कैमरे फिलहाल काम नहीं कर रहे हैं। विभाग ने यह भी बताया कि रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिससे जेलों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके। अदालत ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि महिला कैदियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य की प्राथमिकता होनी चाहिए। इस प्रकार के मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई न केवल न्यायालय की जिम्मेदारी है, बल्कि यह समाज के प्रति भी एक महत्वपूर्ण दायित्व है।
















