Crowd Control Measures: दंगों में पुलिस के गैर-घातक उपायों का महत्व

नई दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। जब शांतिपूर्ण प्रदर्शन अचानक हिंसक रूप ले लेते हैं, तो सुरक्षा एजें
नई दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। जब शांतिपूर्ण प्रदर्शन अचानक हिंसक रूप ले लेते हैं, तो सुरक्षा एजेंसियों को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न गैर-घातक उपकरणों का सहारा लेना पड़ता है। दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) जैसे संगठनों का उद्देश्य उपद्रवियों को नियंत्रित करना है, ताकि किसी प्रकार का जानलेवा नुकसान न हो। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दंगा-रोधी कार्रवाई की शुरुआत सुरक्षा उपकरणों के उपयोग से होती है। ड्यूटी पर तैनात जवानों को विशेष हेलमेट, पारदर्शी वाइजर, गले की सुरक्षा के लिए गार्ड, फुल बॉडी प्रोटेक्टर, आग से बचाने वाली जैकेट और मोटे रबर पैड दिए जाते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य पत्थरबाजी, एसिड अटैक और धारदार हथियारों से जवानों की सुरक्षा करना है। दिल्ली पुलिस की दंगा-रोधी किट में हेलमेट, पाॅलीकार्बोनेट शील्ड, पारंपरिक लाठी, गैस गन, बाडी प्रोटेक्टर और घेराबंदी के लिए विशेष रस्सियां शामिल हैं। हाल के वर्षों में इसमें लान्ग रेंज एकास्टिक डिवाइस (एलआरएडी) भी जोड़ा गया है, जो अत्यधिक तीव्र ध्वनि तरंगें छोड़कर भीड़ को पीछे हटने के लिए मजबूर करता है। इसका उपयोग जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में किया गया था।
भीड़ नियंत्रण में बल प्रयोग का एक क्रमबद्ध तरीका होता है। सबसे पहले, लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को चेतावनी दी जाती है। यदि भीड़ नहीं हटती है, तो जवान शील्ड और लाठियों का उपयोग करके लोगों को पीछे धकेलने का प्रयास करते हैं। इसके बाद, यदि स्थिति और गंभीर हो जाती है, तो 'वरुण' वाटर कैनन का इस्तेमाल किया जाता है, जो तेज दबाव से पानी की बौछार कर भीड़ को तितर-बितर करता है। इसके अतिरिक्त, आंसू गैस के गोले, स्टन ग्रेनेड और पेलार्गोनिक एसिड वैनिलिलामाइड (पीएवीए) आधारित शेल का भी इस्तेमाल किया जाता है, जो मिर्च आधारित रसायन होते हैं और जिनसे व्यक्ति कुछ समय के लिए असहज होकर सक्रिय विरोध करने की स्थिति में नहीं रहता। हालाँकि, पैलेट गन के उपयोग को लेकर सबसे अधिक विवाद होता है। अधिकारियों का कहना है कि 12 बोर पंप-एक्शन गन का उपयोग केवल अंतिम विकल्प के रूप में किया जाता है। इन्हें कम से कम 50 मीटर की दूरी से और कमर के नीचे निशाना बनाकर चलाने के निर्देश हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इन हथियारों का उपयोग निर्धारित दूरी और दिशा से अलग होकर किया जाता है, तो गंभीर चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।

















