High Court: दोहरे हत्याकांड में सजा रद्द, आरोपी बरी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1983 के फर्रुखाबाद में हुए चर्चित दोहरे हत्याकांड के मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए जीवित बचे आरोपी रमाकांत को सभी आरोपों से
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1983 के फर्रुखाबाद में हुए चर्चित दोहरे हत्याकांड के मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए जीवित बचे आरोपी रमाकांत को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के अपराध को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है। ऐसे में रमाकांत को संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए। यह महत्वपूर्ण आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने हरीराम और अन्य की अपील पर सुनवाई के बाद दिया। ट्रायल कोर्ट ने 29 जून 1987 को हरिराम सहित चार आरोपियों को हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ अभियुक्तों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अपील लंबित रहने के दौरान तीन आरोपियों की मृत्यु हो गई, जिसके बाद केवल रमाकांत की अपील पर सुनवाई की गई।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन के दोनों प्रमुख प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की घटनास्थल पर मौजूदगी संदेहास्पद है। न्यायालय ने यह भी माना कि उनके बयान पूरी तरह से विश्वसनीय नहीं हैं। इस मामले में जांच और साक्ष्यों में मौजूद खामियों के कारण अभियोजन आरोप सिद्ध करने में असफल रहा। न्यायालय ने कहा कि जब तक अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को स्पष्ट रूप से साबित नहीं करता, तब तक आरोपी को संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए। इस प्रकार, हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि और सजा को निरस्त करते हुए रमाकांत को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
















