Hunger Strike in Jharkhand: देवेंद्र महतो के साथ अनशन पर बैठे ये चार और लोग कौन हैं?

झारखंड में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने हाल ही में अनशन शुरू किया है, जिसमें उनके साथ चार अन्य अभ्यर्थी भी शामिल हैं। यह अनशन jpsc और jssc परीक्षाओं में कथित
झारखंड में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने हाल ही में अनशन शुरू किया है, जिसमें उनके साथ चार अन्य अभ्यर्थी भी शामिल हैं। यह अनशन JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ चल रहा है। देवेंद्र नाथ महतो ने पानी पीने के बाद भी स्पष्ट किया कि यह अनशन खत्म नहीं हुआ है, बल्कि यह भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ एक नई लड़ाई की शुरुआत है। छात्रों का आक्रोश इस मुद्दे पर बढ़ता जा रहा है और उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक उन्हें लिखित में न्याय नहीं मिलता, वे पीछे नहीं हटेंगे। अनशन पर बैठे अन्य चार अभ्यर्थियों में राहुल क्रांति कुमार, हबीबा, रूपेश और सविता कुमारी शामिल हैं। इन सभी ने अन्न-जल का त्याग किया है और अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
अनशन पर बैठे पांचों अभ्यर्थियों में से देवेंद्र नाथ महतो आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने 14वीं JPSC PT परीक्षा को रद्द करने और CBI जांच की मांग को लेकर अनशन का ऐलान किया। उनकी तबीयत बिगड़ने के बावजूद उन्होंने पानी पीकर अपनी स्थिति को बेहतर किया है। राहुल क्रांति कुमार, जो पिछले 20 वर्षों से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, ने कहा कि इस सिस्टम ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा है। हबीबा, जो रांची की रहने वाली हैं, ने कहा कि जब सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी, तो उन्हें भूखे रहने का निर्णय लेना पड़ा। रूपेश और सविता कुमारी भी इस आंदोलन में शामिल हैं, जो वर्षों की मेहनत के बाद भी सिस्टम की धांधली का शिकार हुए हैं।
इस आंदोलन का असर अब दिखने लगा है, क्योंकि JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और सीआईडी ने अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। हालांकि, अनशन पर बैठे अभ्यर्थियों का कहना है कि यह गिरफ्तारी केवल दिखावे के लिए है। जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा। हाल ही में, देवेंद्र नाथ महतो ने प्रख्यात इनोवेटर सोनम वांगचुक से वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत की, जिसमें उन्होंने आंदोलन के बारे में जानकारी दी और सोनम वांगचुक से रांची आने की अपील की। महतो ने कहा कि जब तक जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती प्रक्रियाओं में हुई अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
















