High Court Suggestion: धार्मिक स्थल पर भीड़ नियंत्रण के वैज्ञानिक तरीके खोजे सरकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में तीर्थ स्थलों और धार्मिक आयोजनों में होने वाली भगदड़ की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की है। न्यायालय ने कहा कि यह केवल प्रशासन की भीड़
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में तीर्थ स्थलों और धार्मिक आयोजनों में होने वाली भगदड़ की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की है। न्यायालय ने कहा कि यह केवल प्रशासन की भीड़ प्रबंधन की विफलता का परिणाम नहीं है, बल्कि भीड़ के मनोविज्ञान के प्रति अज्ञानता का भी नतीजा है। इस संदर्भ में, कोर्ट ने सरकार से आग्रह किया है कि वह कानपुर और रुड़की की भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) सहित अन्य विश्वविद्यालयों की मदद से वैज्ञानिक शोध कराए और इस विषय पर पाठ्यक्रम चलाए। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने यह सुझाव मथुरा के स्वामी शिव स्वरूपानंद जी महाराज की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक वैज्ञानिक अध्ययन और शोध नहीं होगा, तब तक केवल पुलिस बल बढ़ाने, बैरिकेड लगाने या ट्रैफिक डायवर्जन जैसे उपायों से इन त्रासदियों को नहीं रोका जा सकेगा।
कोर्ट ने मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण और प्रशासन से भीड़ प्रबंधन के संबंध में हलफनामा तलब किया था। हलफनामे में दी गई जानकारी से असंतुष्ट होकर, न्यायालय ने सरकार को विस्तृत सुझाव दिए हैं। इसके साथ ही, आदेश की प्रति अनुपालन और जानकारी के लिए मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और भारत सरकार के उच्च शिक्षा सचिव को भी भेजने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि मथुरा, अयोध्या, वाराणसी और चित्रकूट जैसे हजारों वर्षों की धार्मिक विरासत वाले शहरों के लिए केवल दस साल का मास्टर प्लान बनाना एक गंभीर प्रशासनिक विफलता है।
















