Political Controversy in Chandigarh: 20 Thousand Liters of Free Water Proposal Sparks Debate

चंडीगढ़ में नगर निगम के माध्यम से शहरवासियों को 20 हजार लीटर मुफ्त पेयजल देने के प्रस्ताव को लेकर एक बार फिर राजनीतिक विवाद उभर आया है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवा
चंडीगढ़ में नगर निगम के माध्यम से शहरवासियों को 20 हजार लीटर मुफ्त पेयजल देने के प्रस्ताव को लेकर एक बार फिर राजनीतिक विवाद उभर आया है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भाजपा और चंडीगढ़ प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि गरीब लोगों को मुफ्त पानी देने के इस महत्वपूर्ण फैसले को जानबूझकर रोका जा रहा है। तिवारी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि 11 मार्च 2024 को नगर निगम की 333वीं बैठक में सभी पार्षदों ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को पारित किया था, जो कि लोकसभा चुनाव से पहले का निर्णय था। इस प्रस्ताव का उद्देश्य शहर के गरीब तबके को राहत प्रदान करना था, लेकिन इसके बावजूद इसे लागू नहीं किया जा रहा है।
तिवारी ने कहा कि 4 जून 2024 को लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार की हार के नौ दिन बाद, 13 जून 2024 को तत्कालीन प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित ने पंजाब म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट, 1976 की धारा 423 का उपयोग करते हुए इस प्रस्ताव को रद कर दिया। सांसद ने यह भी बताया कि प्रस्ताव पारित होने के 64 दिन बाद इसे निरस्त किया गया, जबकि ऐसा करने से पहले नगर निगम को कारण बताओ नोटिस दिया जाना चाहिए था। इसके बाद, 9 जुलाई 2024 को नगर निगम की 336वीं बैठक में इस मुद्दे को फिर से उठाया गया, जहां सदन ने सर्वसम्मति से प्रशासन के फैसले को खारिज करते हुए मुफ्त पानी के प्रस्ताव को पुनः मंजूरी दे दी।
















