Himcare scam: हिमकेयर घोटाले में अब पूर्व भाजपा सरकार के दो मंत्री जांच के दायरे में, जानें पूरा मामला

हिमकेयर योजना से जुड़े कथित घोटाले की जांच में अब पूर्व भाजपा सरकार के दो मंत्री भी शामिल हो गए हैं। राज्य की विजिलेंस ने स्वास्थ्य विभाग से जुड़े निर्णयों और उ
हिमकेयर योजना से जुड़े कथित घोटाले की जांच में अब पूर्व भाजपा सरकार के दो मंत्री भी शामिल हो गए हैं। राज्य की विजिलेंस ने स्वास्थ्य विभाग से जुड़े निर्णयों और उस समय के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान स्वास्थ्य विभाग का प्रभार दो पूर्व मंत्रियों के पास रहा है। उनके कार्यकाल में लिए गए फैसलों, निजी अस्पतालों को दी गई मंजूरियों और योजना में किए गए भुगतान के रिकॉर्ड की गहनता से जांच की जा रही है। जानकारी के अनुसार, हिमकेयर योजना लागू होने के लगभग छह महीने के भीतर प्रदेश में कई निजी अस्पताल अस्तित्व में आए और इनमें से कई को योजना के तहत मरीजों का उपचार करने के लिए सूचीबद्ध किया गया। यह जांच इस बात पर केंद्रित है कि क्या इन अस्पतालों को अनुमति देने की प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई थी या नहीं। इसके अलावा, यह भी देखा जा रहा है कि क्या इन अस्पतालों को भुगतान नियमों के अनुसार किया गया था।
हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2019 में हिमकेयर योजना की शुरुआत हुई थी। इस योजना का उद्देश्य केंद्र की आयुष्मान योजना में छूटे हुए लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना था। भाजपा सरकार के दौरान स्वास्थ्य विभाग का प्रभार तीन बार अलग-अलग मंत्रियों के पास रहा। निजी अस्पतालों को सूचीबद्ध करने की फाइलें मंत्रियों तक पहुंची थीं। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इन अस्पतालों को अनुमति देने की प्रक्रिया क्या थी, क्या निर्धारित मानकों का पालन किया गया और बाद में इन संस्थानों को किए गए भुगतान नियमों के अनुरूप थे या नहीं। सूत्रों के अनुसार, जांच में उन मामलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिनमें निजी अस्पतालों को बड़ी राशि के बिलों का भुगतान किया गया। भुगतान से संबंधित फाइलों, अस्पतालों के दावों, मरीजों के उपचार रिकॉर्ड और विभागीय स्वीकृतियों का मिलान किया जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर तत्कालीन अधिकारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से भी पूछताछ की जा सकती है।
जांच एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि कहीं योजना का दुरुपयोग कर फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर दावे तो प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी या मिलीभगत के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित अधिकारियों, अस्पताल प्रबंधन और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह जांच पूरी तरह साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है और किसी भी व्यक्ति की भूमिका मिलने पर उसे जांच के दायरे में लाया जाएगा। हिमकेयर जैसी जनकल्याणकारी योजना में यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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