Judicial Challenge to New Tax System: इलाहाबाद HC के जज की नए टैक्स सिस्टम के खिलाफ याचिका मामला

प्रयागराज से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति संदीप जैन ने नए टैक्स सिस्टम के तहत अपनी कुल आय से कानूनी अलाउंस पर छूट न मिलने के खिल
प्रयागराज से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति संदीप जैन ने नए टैक्स सिस्टम के तहत अपनी कुल आय से कानूनी अलाउंस पर छूट न मिलने के खिलाफ याचिका दायर की है। इस मामले में केंद्र सरकार और आयकर विभाग से चार हफ्ते के भीतर जवाब मांगा गया है। न्यायमूर्ति जैन के मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ द्वारा की जा रही है। खंडपीठ ने भारत सरकार और सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) से इस मामले में जानकारी मांगी है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि नए टैक्स सिस्टम के तहत न्यायमूर्ति जैन को कानूनी अलाउंस पर छूट क्यों नहीं दी जा रही है।
इस मामले में विभाग के अधिवक्ता अंकुर अग्रवाल ने जानकारी दी और बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली टैक्स बार एसोसिएशन केस में कहा है कि नई स्कीम में कानूनी अलाउंस के लिए अलग से उपबंध नहीं किया गया है। इसके साथ ही, उन्होंने जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा है। न्यायमूर्ति जैन ने नए टैक्स सिस्टम को चुनने के बाद अपनी कुल आय से हाई कोर्ट जज (सैलरी और सर्विस की शर्तें) अधिनियम, 1954 की धारा 22 डी के तहत तय कानूनी अलाउंस पर छूट न मिलने को चुनौती दी है। धारा 22 डी के तहत हाई कोर्ट जज के आधिकारिक आवास, आने-जाने की सुविधाओं, सत्कार अलाउंस और लीव ट्रैवल कंसेशन की कीमत को आयकर से छूट दी जाती है।
















