Judicial Transfer of Judge Sentencing Azam Khan: आजम खान को 10 साल की सजा सुनाने वाले जज का हुआ तबादला

रामपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश हाई कोर्ट ने हाल ही में कई न्यायिक अधिकारियों के तबादले किए हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण तबादला सपा नेता आजम खा
रामपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश हाई कोर्ट ने हाल ही में कई न्यायिक अधिकारियों के तबादले किए हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण तबादला सपा नेता आजम खान के मामलों की सुनवाई कर रहे अपर जिला जज डॉ. विजय कुमार का है। डॉ. विजय कुमार ने आजम खान के खिलाफ कई मामलों में निर्णय सुनाए थे, जिनमें से एक मामला 23 मई 2026 को दो पैन कार्ड से संबंधित था, जिसमें उनकी सजा को सात साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया था। इसके अलावा, 30 मई 2024 को डूंगरपुर प्रकरण में भी उन्होंने आजम खान को 10 साल की सजा और 14 लाख रुपये का जुर्माना सुनाया था। वर्तमान में, आजम खान के खिलाफ डूंगरपुर के पांच मामलों की सुनवाई उनकी अदालत में चल रही थी, जिसमें अभियोजन की गवाही पूरी हो चुकी है और अब बचाव पक्ष की गवाही चल रही है।
हाल ही में, शुक्रवार को एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में आजम खान के खिलाफ चल रहे क्वालिटी बार पर कब्जा करने के मामले में आरोप तय नहीं हो सके। इस मामले में आजम खान के अधिवक्ता ने स्थगन प्रार्थना पत्र देकर समय मांगा, जिसके चलते अब 14 अगस्त को आरोप तय किए जाएंगे। यह मामला सिविल लाइंस कोतवाली क्षेत्र का है, जहां 21 नवंबर 2019 को तत्कालीन राजस्व निरीक्षक अनंगराज सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप में कहा गया था कि आजम खान ने मंत्री रहते हुए जिला सहकारी संघ की जमीन पर बने क्वालिटी बार की 302 वर्ग मीटर जगह को अपनी पत्नी, पूर्व सांसद डॉ. तजीन फात्मा को 1200 रुपये किराये पर दिलवाया था। इस मामले में आजम खान के बेटे अब्दुल्ला को भी सह किरायेदार के रूप में दर्शाया गया था।
इस मामले में जिला सहकारी संघ के चेयरमैन जफर अली जाफरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह प्रस्ताव पास किया गया था। अब तक इस मुकदमे में सभी आरोपित बनाए गए हैं। आजम खान के खिलाफ चल रहे मामलों की सुनवाई में यह तबादला एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, क्योंकि इससे उनकी कानूनी स्थिति पर प्रभाव पड़ सकता है। यह देखना होगा कि नए जज के आने के बाद इस मामले की सुनवाई कैसे आगे बढ़ती है और क्या आजम खान को न्याय मिलेगा या नहीं। इस प्रकार के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की गति और निष्पक्षता पर सभी की निगाहें बनी रहेंगी।
















